उत्तर प्रदेश

PrisonHealth – लखनऊ के अस्पताल में छह माह से भर्ती पूर्व मंत्री, उठने लगे सवाल

PrisonHealth – सामूहिक दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पिछले करीब छह महीनों से लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल के एक निजी वार्ड में भर्ती हैं। जेल में रहते हुए उन पर हुए हमले के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था। हालांकि लंबे समय से अस्पताल में उनके रहने को लेकर अब चर्चा तेज हो गई है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इतने लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की स्थिति क्यों बनी हुई है और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया को लेकर क्या फैसला लिया जाएगा।

जेल में हमले के बाद अस्पताल में कराया गया था भर्ती

जानकारी के अनुसार 1 अक्टूबर 2025 को जेल परिसर में एक अन्य बंदी ने गायत्री प्रजापति पर हमला कर दिया था। इस घटना में उनके सिर पर चोट आई थी। हमले के बाद उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और प्रारंभिक इलाज के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की देखरेख में कुछ दिनों तक उनका उपचार वहीं चला।

इसके बाद चिकित्सकीय सलाह पर उन्हें लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। तब से वह इसी अस्पताल के निजी कक्ष में भर्ती हैं, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम नियमित रूप से उनकी सेहत की निगरानी कर रही है।

कई पुरानी बीमारियों से भी जूझ रहे हैं

अस्पताल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पूर्व मंत्री को केवल सिर की चोट का ही उपचार नहीं दिया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें पहले से ही कई स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनका इलाज भी साथ-साथ चल रहा है। इनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गुर्दे से जुड़ी परेशानी और लंबे समय से रहने वाला कमर दर्द शामिल बताया गया है।

इन्हीं कारणों से डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई पुरानी बीमारियों के चलते मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, इसलिए नियमित निगरानी और इलाज जरूरी होता है।

लंबे समय तक भर्ती रहने पर उठ रहे सवाल

हालांकि अस्पताल में पिछले छह महीनों से चल रहे उपचार को लेकर अब सवाल भी सामने आने लगे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यदि इतने लंबे समय के बाद भी स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है, तो मरीज को किसी बड़े या विशेष चिकित्सा संस्थान में रेफर करने पर विचार किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि यदि स्थिति स्थिर है तो आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए कि मरीज को अस्पताल में ही रखा जाएगा या फिर जेल वापस भेजा जाएगा। फिलहाल इस पूरे मामले में आधिकारिक तौर पर कोई नई जानकारी सामने नहीं आई है।

अस्पताल परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

पूर्व मंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्पताल परिसर में विशेष इंतजाम किए गए हैं। उनके कमरे के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है और अस्पताल प्रशासन भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सुरक्षा कारणों से उनके वार्ड के आसपास सामान्य लोगों की आवाजाही सीमित रखी गई है।

प्रशासन का कहना है कि इलाज के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, इसलिए पुलिस और अस्पताल कर्मी मिलकर व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं।

डॉक्टरों की सलाह के आधार पर होगा अगला फैसला

बलरामपुर अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या ने बताया कि मरीज का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में चल रहा है। उनके अनुसार चिकित्सक नियमित जांच के आधार पर ही उपचार की प्रक्रिया तय करते हैं। मरीज की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए ही आगे के कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि इलाज से जुड़े सभी निर्णय डॉक्टरों की सलाह और मेडिकल जरूरतों को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे। फिलहाल चिकित्सा टीम लगातार मरीज की स्थिति का आकलन कर रही है और उसी आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

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