उत्तर प्रदेश

Monsoon – उत्तर प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी, बढ़ी गर्मी की चिंता

Monsoon – उत्तर प्रदेश में इस वर्ष मानसून के आगमन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि सामान्य समय की तुलना में मानसून की दस्तक में देरी हो सकती है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और लू का असर लंबे समय तक बना रह सकता है। शुरुआती संकेत यह भी बताते हैं कि आने वाले महीनों में वर्षा सामान्य स्तर से कम रह सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अभी तक कोई मजबूत मौसमीय प्रणाली सक्रिय नहीं हुई है, जिसके चलते बारिश की गतिविधियां अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही हैं। इसका असर तापमान और कृषि दोनों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सामान्य से कम बारिश की संभावना

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल वर्षा सामान्य औसत से कम रह सकती है। प्रारंभिक आकलनों के अनुसार, जून माह में वर्षा का स्तर सामान्य से काफी नीचे रहने की संभावना है। यदि यही स्थिति आगे भी बनी रहती है, तो कृषि क्षेत्र के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर और पर्याप्त बारिश न होने से खेती की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई का प्रमुख स्रोत मानसूनी वर्षा ही है।

खरीफ फसलों पर पड़ सकता है असर

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जून के शुरुआती सप्ताहों में होने वाली बारिश कई खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। समय पर वर्षा न होने की स्थिति में सब्जियों और अन्य मौसमी फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है।

अरहर, मक्का, बाजरा जैसी प्रमुख फसलों के साथ-साथ लौकी, करेला, तोरई और भिंडी जैसी सब्जियों के उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। किसान मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

पुराने सूखे वर्षों जैसी स्थिति की आशंका

मौसम विशेषज्ञों ने संकेत दिए हैं कि इस वर्ष की परिस्थितियां कुछ हद तक उन वर्षों जैसी हो सकती हैं, जब वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई थी। कम बारिश की स्थिति में कृषि उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है, जिसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि अंतिम निष्कर्ष मौसम की आगामी गतिविधियों पर निर्भर करेगा और स्थिति में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी

उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश के अन्य राज्यों में भी मानसून की प्रगति अपेक्षा से धीमी बताई जा रही है। शुरुआती मानसूनी चरण में कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी है क्योंकि बड़ी मात्रा में खेती अभी भी वर्षा पर निर्भर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो कई राज्यों में कृषि गतिविधियों पर असर दिखाई दे सकता है।

अगले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत नहीं

मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए लू का येलो अलर्ट जारी किया है। पूर्वी, मध्य और तराई क्षेत्रों के कई हिस्सों में गर्म हवाओं का असर जारी रहने की संभावना है। अधिकारियों ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।

विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई गई है।

कई जिलों में तापमान 40 डिग्री के पार

बीते दिनों प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन उससे गर्मी में व्यापक राहत नहीं मिली। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक तापमान ऊंचे स्तर पर बना रह सकता है।

फिलहाल प्रदेश के लोग मानसून के सक्रिय होने और तापमान में गिरावट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि मौसम विभाग लगातार परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.