उत्तर प्रदेश

Medical Negligence – लखनऊ में इलाज के बाद युवक की संदिग्ध मौत पर सवाल

Medical Negligence – राजधानी लखनऊ के बाहरी इलाके में इलाज के दौरान एक युवक की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पतालों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार को हुई इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से औपचारिक शिकायत करने की बात कही है। मामला दुबग्गा थाना क्षेत्र के इटौली गांव से जुड़ा है, जहां 36 वर्षीय गंगाराम यादव की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। परिवार में उनकी पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं, जिनके सामने अचानक आई इस त्रासदी ने कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ दिए हैं।

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इलाज से पहले की स्थिति और अस्पताल में भर्ती
परिवार के सदस्यों के अनुसार, करीब पंद्रह दिन पहले गंगाराम के बाएं पैर में लगातार दर्द और तकलीफ की शिकायत थी, जिसके बाद उन्हें स्थानीय स्तर पर विकल्प अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती जांचों के बाद चिकित्सकों ने ऑपरेशन की सलाह दी, जिसे परिवार ने आवश्यक समझते हुए मंजूरी दे दी। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती के समय उनकी सामान्य स्थिति स्थिर थी और उन्हें उम्मीद थी कि सर्जरी के बाद वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो जाएंगे।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ती हालत
सर्जरी के कुछ समय बाद ही गंगाराम की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद दी गई दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव के कारण उनके शरीर में गंभीर जटिलताएं पैदा हो गईं। परिजनों के मुताबिक, उनकी किडनी और लीवर पर गंभीर असर पड़ा और वह तेजी से कमजोर पड़ने लगे। इस दौरान परिवार ने बार-बार अस्पताल प्रबंधन से बेहतर इलाज की मांग की, लेकिन उनका दावा है कि स्थिति पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं किया जा सका।

रेफरल और मेदांता में अंतिम कोशिश
हालत गंभीर होते देख विकल्प अस्पताल ने उन्हें दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन रविवार को उन्हें मेदांता अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। हालांकि, तमाम चिकित्सीय प्रयासों के बावजूद सोमवार को गंगाराम ने दम तोड़ दिया। परिवार के लिए यह पल बेहद पीड़ादायक था, क्योंकि वे अंतिम क्षण तक उनके बचने की उम्मीद लगाए बैठे थे।

परिवार के आरोप और सवाल
मृतक के परिजनों ने विकल्प अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सही इलाज और निगरानी होती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। परिवार ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इलाज में कहीं कोई चूक हुई थी या नहीं। उन्होंने यह भी कहा है कि वे इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे।

पुलिस की प्रारंभिक प्रतिक्रिया
दुबग्गा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर श्रीकांत राय ने बताया कि अभी तक उन्हें लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही शिकायत मिलेगी, मामले की जांच शुरू की जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में इसी तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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