उत्तर प्रदेश

LPGLeak – लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर गैस रिसाव से घंटों मची अफरातफरी, लंबा जाम

LPGLeak – लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर बुधवार शाम एक बड़ा हादसा टल गया, जब सफेदाबाद के पास घरेलू गैस से भरे एक टैंकर से अचानक रिसाव शुरू हो गया। देखते ही देखते आसपास के इलाके में दहशत फैल गई और प्रशासन को तुरंत हाईवे के दोनों ओर यातायात रोकना पड़ा। हालात इतने गंभीर हो गए कि देर रात तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी।

घटना की शुरुआत और टैंकर में रिसाव
यह घटना बाराबंकी के शहर कोतवाली क्षेत्र में वेदम वर्ल्ड स्कूल के नजदीक करीब शाम 5:30 बजे हुई। इंडियन ऑयल का एक टैंकर, जिसमें लगभग 17 टन एलपीजी भरी हुई थी, लखनऊ से अयोध्या की ओर जा रहा था। अचानक टैंकर के एक वाल्व से तेज गति से गैस निकलने लगी। चालक ने स्थिति को भांपते हुए वाहन रोक दिया, लेकिन घबराहट में वह मौके से चला गया। गैस के तेजी से फैलने के कारण आसपास के लोगों में डर का माहौल बन गया।

हाईवे बंद, लंबा जाम और बिजली सप्लाई रोकी गई
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पहले एक लेन बंद की, लेकिन रिसाव बढ़ने पर दोनों दिशाओं में यातायात पूरी तरह रोक दिया गया। इसके चलते करीब 20 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। सुरक्षा के लिहाज से आसपास के इलाकों की बिजली सप्लाई भी बंद कर दी गई, ताकि किसी भी तरह की चिंगारी से बड़ा हादसा न हो। कई एंबुलेंस भी इस जाम में फंस गईं, जिससे आपात सेवाओं पर भी असर पड़ा।

दमकल और प्रशासन की टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। लखनऊ और बाराबंकी से कुल 12 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को लगाया गया, जिन्होंने गैस रिसाव को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू की। पुलिस ने लगातार माइक से लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने और आग से संबंधित किसी भी गतिविधि से बचने की अपील की। पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था।

ट्रैफिक डायवर्जन के बावजूद राहत नहीं
यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए पुलिस ने वैकल्पिक मार्गों का सहारा लिया। इंदिरा नहर के पास से किसान पथ के जरिए वाहनों को डायवर्ट किया गया, जबकि देवा रोड सहित अन्य मार्गों पर भी ट्रैफिक मोड़ा गया। हालांकि इन प्रयासों के बावजूद देर रात तक जाम पूरी तरह खत्म नहीं हो सका और लोगों को घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी।

विशेषज्ञ टीम भी देर रात तक असफल
गैस रिसाव की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी रही। गैस हवा के दबाव से ऊपर उठने के बाद नीचे फैल रही थी, जिससे खतरा और बढ़ गया था। जब स्थानीय स्तर पर नियंत्रण संभव नहीं हुआ, तो बंथरा स्थित गैस प्लांट से विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया। इसके बावजूद संयुक्त प्रयासों के बाद भी देर रात तक रिसाव पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका था।

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