KGMU Forced Conversion Controversy: लखनऊ केजीएमयू में धर्म और गरिमा पर लगी आग, वीसी ऑफिस में तोड़फोड़ से हड़कंप
KGMU Forced Conversion Controversy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में प्रदर्शन करने पहुंच गए। धर्मांतरण और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों को लेकर उपजा यह आक्रोश इतना तीव्र था कि प्रदर्शनकारियों ने (Institutional Security Breach) की परवाह किए बिना केजीएमयू के प्रशासनिक भवन में जमकर हंगामा किया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संस्थान के भीतर एक सोची-समझी साजिश के तहत महिला उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन का खेल चल रहा है, जिस पर प्रशासन मौन साधे हुए है

कुलपति कार्यालय में घुसे प्रदर्शनकारी और पांच मिनट का ‘कब्जा’
हंगामे के दौरान स्थिति उस वक्त बेकाबू हो गई जब आक्रोशित भीड़ कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद के कार्यालय के भीतर जबरन दाखिल हो गई। प्रदर्शनकारियों ने न केवल वहां तोड़फोड़ की, बल्कि कुलपति कार्यालय का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। लगभग पांच मिनट तक (Administrative Office Vandalism) का यह दौर चलता रहा, जिससे परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी दहशत में आ गए। हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि वे तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक पीड़ित महिला को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों को सजा नहीं मिल जाती।
आरोपी डॉक्टर रमीज की फरारी और बढ़ता जनाक्रोश
इस पूरे विवाद के केंद्र में डॉ. रमीज का नाम सामने आया है, जिन पर धर्मांतरण के लिए दबाव डालने और यौन शोषण करने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना के बाद से ही आरोपी डॉक्टर फरार चल रहा है, जिसे लेकर (Police Search Operations) पर भी सवाल उठ रहे हैं। हिंदू संगठनों का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि केजीएमयू जैसे विश्वस्तरीय संस्थान में कार्यरत एक डॉक्टर इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में कैसे संलिप्त हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने केजीएमयू प्रशासन के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया।
राज्य महिला आयोग की सक्रियता और अपर्णा यादव की एंट्री
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव भी तुरंत केजीएमयू पहुंचीं। उन्होंने पीड़ित महिला से जुड़ी जानकारी ली और प्रशासन से अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा। अपर्णा यादव की उपस्थिति ने इस मामले को (Women Safety Standards) के नजरिए से और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। महिला आयोग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों की गहन जांच की जाएगी।
केजीएमयू प्रशासन की चुप्पी और सुरक्षा पर उठते सवाल
वीसी कार्यालय में हुई तोड़फोड़ और धर्मांतरण के आरोपों ने केजीएमयू की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक पकड़ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जब हिंदू संगठन के लोग (Security Protocol Failure) को तोड़ते हुए सीधे कुलपति के केबिन तक पहुंच गए, तब सुरक्षा बल मूकदर्शक बने रहे। अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच भी इस हंगामे के कारण डर का माहौल बना रहा। संस्थान के भीतर चल रहे इस बवाल ने मेडिकल शिक्षा के माहौल को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
न्याय की मांग और भविष्य की चेतावनी
हिंदू संगठनों के नेताओं ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यह प्रदर्शन सिर्फ शुरुआत है। अगर डॉ. रमीज की जल्द गिरफ्तारी नहीं होती और केजीएमयू प्रशासन (Internal Inquiry Committee) के जरिए सच सामने नहीं लाता, तो लखनऊ की सड़कों पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। उनकी मांग है कि आरोपी डॉक्टर की डिग्री रद्द की जाए और उसे तुरंत सेवा से बर्खास्त किया जाए। फिलहाल, भारी पुलिस बल की तैनाती के बाद परिसर में स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन तनाव की लपटें अभी शांत नहीं हुई हैं।



