CivicIssue – उपमुख्यमंत्री आवास में दोबारा भरा पानी, अधिकारियों पर जताई नाराजगी
CivicIssue – लखनऊ में मानसून से पहले ही जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास परिसर में कुछ दिनों के भीतर दूसरी बार गंदा पानी भरने की घटना सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर नाराजगी जताई गई है। बताया जा रहा है कि शिकायत और निरीक्षण के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका, जिससे मामला अधिकारियों के संज्ञान में गंभीरता से उठाया गया है।

कुछ दिनों में दूसरी बार हुई परेशानी
राजधानी के सात कालिदास मार्ग स्थित उपमुख्यमंत्री के सरकारी आवास में बीते दिनों नाले और सीवर का पानी परिसर तक पहुंच गया। इससे आवास के लॉन और आसपास के हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। इससे पहले भी इसी तरह की समस्या सामने आई थी, जिसके बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची थी और पानी निकलवाने का काम किया गया था।
स्थानीय स्तर पर यह आश्वासन भी दिया गया था कि समस्या की जड़ तक पहुंचकर स्थायी समाधान किया जाएगा, लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर दोहराई गई।
नगर निगम को भेजा गया पत्र
समस्या दोबारा सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से नगर निगम प्रशासन को पत्र भेजकर नाराजगी दर्ज कराई गई। पत्र में कहा गया कि आवास परिसर में सीवर और नाले का पानी पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि पूर्व में संबंधित अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जा चुका था।
कार्यालय की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि जब निरीक्षण के दौरान समाधान का आश्वासन दिया गया था, तो फिर समस्या दोबारा क्यों उत्पन्न हुई।
निरीक्षण के बाद भी नहीं निकला स्थायी हल
जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलने पर संबंधित तकनीकी अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान समस्या दूर करने का भरोसा दिया गया, लेकिन उसके बाद भी जलभराव की स्थिति बनी रही। इससे प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पत्र में यह भी मांग की गई है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
वर्षों से बनी हुई है समस्या
स्थानीय जानकारों के मुताबिक, यह कोई नई समस्या नहीं है। बारिश के मौसम में इस क्षेत्र में जलभराव की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। बताया जाता है कि हर वर्ष बरसात के दौरान नाले और सीवर व्यवस्था पर दबाव बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा होने की स्थिति बन जाती है।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि समस्या लंबे समय से मौजूद है, तो अब तक इसके लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी।
प्रशासन ने दिए समाधान के निर्देश
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद टीम को मौके पर भेजा गया था और तत्काल राहत के लिए पानी निकालने का कार्य कराया गया। अधिकारियों के अनुसार अब केवल अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी समाधान पर ध्यान दिया जा रहा है।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि जलनिकासी व्यवस्था की विस्तृत जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
मानसून से पहले बढ़ी चिंता
बारिश का मौसम पूरी तरह शुरू होने से पहले ही इस तरह की घटनाओं ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्थायी सुधार नहीं किए गए, तो भारी वर्षा के दौरान कई इलाकों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है।
फिलहाल नगर निगम और संबंधित विभागों की ओर से समाधान की प्रक्रिया जारी है, जबकि स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।