उत्तर प्रदेश

BriberyCase – मुजफ्फरपुर में रिश्वत लेते सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार

BriberyCase – मुजफ्फरपुर जिले में एक बार फिर पुलिस महकमे पर सवाल खड़े हुए हैं। सदर थाना में तैनात सब-इंस्पेक्टर भास्कर कुमार मिश्रा को निगरानी विभाग की टीम ने कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान टीम ने उनके पास से नकद राशि भी बरामद की। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है और मामले की आगे की जांच जारी है।

शिकायत के बाद बिछाया गया जाल

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई एक लिखित शिकायत के आधार पर की गई। पीड़ित पक्ष ने निगरानी थाना, पटना में आवेदन देकर आरोप लगाया था कि एक अपहरण मामले में नामजद आरोपी का नाम केस डायरी से हटाने के बदले पैसे की मांग की जा रही है। शिकायत मिलते ही निगरानी विभाग ने प्राथमिक जांच की और आरोपों को गंभीर मानते हुए विशेष धावा दल का गठन किया।

योजना के तहत जाल बिछाया गया और तय समय पर टीम ने कार्रवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। अधिकारियों के अनुसार, मौके से 15 हजार रुपये बरामद किए गए हैं।

कितनी रकम की हुई थी मांग

पीड़ित परिवार का आरोप है कि शुरुआत में 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। बाद में बातचीत के दौरान यह राशि घटाकर 30 हजार रुपये कर दी गई। बताया गया कि भुगतान दो किश्तों में करने को कहा गया था, प्रत्येक किश्त 15-15 हजार रुपये की।

परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी रकम देना उनके लिए संभव नहीं था, लेकिन संबंधित अधिकारी की ओर से कथित रूप से दबाव बनाया जा रहा था। जब बात आगे बढ़ी, तो पीड़ित ने मामले की जानकारी निगरानी विभाग को दी।

आरोपी अधिकारी की पृष्ठभूमि

निगरानी टीम से मिली जानकारी के अनुसार, भास्कर कुमार मिश्रा पूर्णिया जिले के निवासी हैं और वर्ष 2019 बैच के सब-इंस्पेक्टर हैं। वे इस समय मुजफ्फरपुर के सदर थाना में पदस्थापित थे।

शिकायतकर्ता अमन कुमार ने बताया कि उनके भाई आनंद कुमार को एक अपहरण मामले में आरोपी बनाया गया था। हालांकि बाद में अदालत से उन्हें जमानत मिल गई थी। आरोप है कि अनुसंधान पदाधिकारी के रूप में कार्यरत सब-इंस्पेक्टर ने केस डायरी से नाम हटाने के बदले पैसे की मांग की।

कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया

निगरानी टीम के डीएसपी संजय कुमार ने पुष्टि की कि आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि बरामद राशि को जब्त कर लिया गया है और मामले में विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विभागीय स्तर पर भी जांच की संभावना जताई जा रही है।

पुलिस विभाग पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा छेड़ दी है। हालांकि विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि निगरानी विभाग की सक्रियता ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका निभाती है। वहीं, नागरिकों से भी अपील की जाती है कि यदि किसी सरकारी अधिकारी द्वारा अवैध मांग की जाए तो इसकी सूचना संबंधित एजेंसियों को दें।

फिलहाल आरोपी अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले की जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

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