AyodhyaVisit – नागालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव ने किए रामलला के दर्शन
AyodhyaVisit – नागालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव बुधवार को अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि परिसर में विधिवत दर्शन-पूजन किया। अयोध्या पहुंचने के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया और रामलला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने इसे अपने लिए एक आध्यात्मिक और विशेष अनुभव बताया।

दर्शन के बाद साझा किए अपने भाव
मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल नंदकिशोर यादव ने कहा कि अयोध्या आना उनके लिए किसी सामान्य यात्रा जैसा नहीं, बल्कि गहरे भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव है। उन्होंने कहा कि भगवान राम उनके लिए पाहुन के समान हैं, इसलिए वे अपने पाहुन के घर आए हैं। उन्होंने इस यात्रा को आत्मीयता और श्रद्धा से जुड़ा हुआ बताया।
राम मंदिर को बताया राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक
राज्यपाल ने राम जन्मभूमि मंदिर को देश की आस्था और सम्मान से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण स्थल बताया। उनके अनुसार, यह मंदिर केवल एक धार्मिक संरचना नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक संघर्ष का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय के इंतजार के बाद इस मंदिर का निर्माण होना पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
भगवान राम के आदर्शों पर दिया जोर
अपने वक्तव्य में उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन मूल्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राम केवल पूजा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन से समाज को अनुशासन, जिम्मेदारी और त्याग की सीख मिलती है। राम के आदर्श आज भी समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राम परिवार की सांस्कृतिक महत्ता
राज्यपाल ने यह भी कहा कि राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान का स्वरूप भारतीय संस्कृति में पारिवारिक एकता और समर्पण का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों का प्रतिबिंब भी है। इस प्रकार की परंपराएं समाज को जोड़ने का काम करती हैं।
नई अयोध्या में दिख रहा विकास और आस्था का संगम
नंदकिशोर यादव ने अयोध्या में हो रहे बदलावों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शहर अब आध्यात्मिकता के साथ-साथ विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। यहां आने वाले लोगों को एक अलग तरह का अनुभव होता है, जिसमें संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता का संतुलन दिखाई देता है।
देशभर के लोगों के लिए आस्था का केंद्र
राज्यपाल के अनुसार, अयोध्या आज केवल एक शहर नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे देश के लोगों की भावनाओं का केंद्र बन चुका है। यहां आने वाला हर व्यक्ति खुद को इस भूमि से जुड़ा हुआ महसूस करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के स्थल राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।