Ansal Properties Insolvency Case Update: दांव पर लगा है 5000 परिवारों का आशियाना, अंसल के दिवालिया मामले में आया नया मोड़
Ansal Properties Insolvency Case Update: उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर में अंसल ग्रुप और उसके हजारों आवंटियों के बीच चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने अंसल को दिवालिया घोषित करने वाले पिछले आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। करीब 10 महीने तक चली लंबी (Corporate Insolvency Resolution Process) की सुनवाई के बाद आए इस फैसले से लगभग 5000 आवंटियों को तत्काल राहत तो नहीं मिली, लेकिन उनके लिए कानूनी दरवाजे जरूर खुल गए हैं। निवेशक और घर खरीदार अब एक बार फिर अपनी खून-पसीने की कमाई को बचाने के लिए नई उम्मीद के साथ अदालत की ओर देख रहे हैं।

एनसीएलटी को दोबारा सुनवाई करने का सख्त निर्देश
अपीलीय न्यायाधिकरण ने मामले की गंभीरता को समझते हुए निचली अदालत यानी एनसीएलटी को निर्देश दिया है कि वह सभी पक्षों की दलीलों को फिर से सुने। गौर करने वाली बात यह है कि (Legal Rights of Homebuyers) को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था, क्योंकि पिछली कार्यवाही में आवंटियों का पक्ष सही तरीके से नहीं रखा गया था। अब आवंटियों के पास 15 से 20 दिन का समय है, जिसमें वे अपनी आपत्तियों और दावों को मजबूती से कोर्ट के सामने रख सकते हैं। इस आदेश ने उन हजारों परिवारों को एक नया अवसर दिया है जो वर्षों से अपने घर का सपना टूटने के डर में जी रहे थे।
वित्तीय संस्थानों का भारी बकाया और याचिका का आधार
अंसल ग्रुप की मुश्किलें तब शुरू हुईं जब वह वित्तीय संस्थान आईएलएफएस (IL&FS) के करीब 83 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने में विफल रहा। इसी वित्तीय चूक के आधार पर (Financial Creditor Claims) के तहत अंसल को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। शुरुआत में एनसीएलटी ने केवल लेनदारों की बात सुनी और आवंटियों की याचिकाओं को दरकिनार कर दिया था। अब एनसीएलएटी ने स्पष्ट किया है कि हाईटेक टाउनशिप के जटिल नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है ताकि आम नागरिकों के हितों की बलि न चढ़े।
लखनऊ विकास प्राधिकरण की सक्रियता और करोड़ों की देनदारी
इस पूरे मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) अब एक सक्रिय पक्षकार के रूप में उभरा है। एलडीए का दावा है कि अंसल ग्रुप पर सरकारी देयताओं के रूप में लगभग (LDA Liability Claims on Ansal) 4500 करोड़ रुपये का बकाया है। इसमें भूमि अर्जन, मानचित्र शुल्क और अन्य प्रशासनिक खर्च शामिल हैं। प्राधिकरण का कहना है कि एनसीएलटी ने पहले उन्हें नोटिस तक जारी नहीं किया था, जिससे सरकारी खजाने और होम बायर्स दोनों का हित संकट में पड़ गया था। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अब एलडीए प्रभावी पैरवी कर रहा है।
बंधक भूमि की अवैध बिक्री ने बढ़ाया विवाद का घेरा
जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि अंसल ने हाईटेक टाउनशिप नीति के तहत परफार्मेंस गारंटी के रूप में (Breach of Township Policy) के तहत एलडीए के पास जो 411 एकड़ भूमि बंधक रखी थी, उसे भी अनधिकृत तरीके से बेच दिया गया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि विश्वासघात का एक बड़ा मामला भी है। एलडीए ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करा दी है और एनसीएलटी को इस धोखाधड़ी के बारे में विस्तार से सूचित करने की तैयारी कर ली है। बंधक भूमि की अवैध बिक्री से अब प्रोजेक्ट की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
आवंटियों के पास अपनी बात रखने का आखिरी मौका
आवंटी गगन टंडन और उनके साथियों का मानना है कि एनसीएलएटी का ताजा आदेश एक लाइफलाइन की तरह है। अब आवंटी (Representing Homebuyers in NCLT) के जरिए यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि अंसल को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया में उनके हितों को नजरअंदाज किया गया है। अगले दो सप्ताह के भीतर आवंटियों को अपने सभी दस्तावेजी प्रमाण जुटाकर कोर्ट में दाखिल करने होंगे। यह लड़ाई अब केवल पैसे की नहीं बल्कि उन हजारों लोगों के भविष्य की है जिन्होंने अपने जीवन की जमापूंजी इस उम्मीद में लगा दी थी कि उन्हें सिर छुपाने के लिए छत मिलेगी।
रिसीवर की नियुक्ति और प्रशासन का सख्त रुख
अपीलीय न्यायाधिकरण ने लखनऊ के प्रोजेक्ट्स के लिए एक नया रिसीवर नियुक्त करने का भी आदेश दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि (Appointment of Insolvency Receiver) के माध्यम से संपत्तियों का प्रबंधन निष्पक्ष रूप से हो सके। एलडीए ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उनका पक्ष सुने बिना अब कोई भी आदेश पारित नहीं किया जा सकेगा। सरकारी विभागों की देयता और आवंटियों के हक को प्राथमिकता देने के लिए प्रशासन अब हर कानूनी विकल्प को आजमाने के लिए तैयार है। यह नया रिसीवर संपत्तियों की वर्तमान स्थिति और आवंटियों की सूची का सत्यापन करेगा।
क्या निकलेगा इस कानूनी पेचीदगी का समाधान?
अंसल ग्रुप का यह मामला भारतीय रियल एस्टेट जगत के लिए एक नजीर बन सकता है। जहां एक तरफ (Real Estate Regulatory Challenges) और दिवालिया कानून के बीच टकराव की स्थिति है, वहीं दूसरी तरफ हजारों आवंटियों की उम्मीदें हैं। एनसीएलटी की आगामी सुनवाई यह तय करेगी कि क्या अंसल के पास इस संकट से निकलने का कोई रास्ता है या फिर संपत्तियों को बेचकर लेनदारों और आवंटियों का भुगतान किया जाएगा। आने वाले कुछ हफ्ते उत्तर प्रदेश के हजारों घर खरीदारों के लिए बेहद तनावपूर्ण और निर्णायक होने वाले हैं।



