AIHealthcare – पीजीआई में शुरू हुआ 500 करोड़ का एआई प्रोजेक्ट
AIHealthcare – लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक को शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। संस्थान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हेल्थ केयर परियोजना शुरू की जा रही है, जिस पर अगले पांच वर्षों में लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। एकेडमिक काउंसिल से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद प्रारंभिक कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

इस परियोजना का उद्देश्य रोगों की पहचान, रिपोर्ट विश्लेषण और उपचार संबंधी निर्णयों को अधिक सटीक और तेज बनाना है। संस्थान का मानना है कि डिजिटल तकनीक के समुचित उपयोग से मरीजों को बेहतर और समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
अत्याधुनिक सेंटर की स्थापना
परियोजना के तहत एक समर्पित एआई हेल्थ केयर सेंटर बनाया जाएगा, जहां उच्च क्षमता वाले कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से बड़ी मात्रा में चिकित्सीय आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। लगभग 10 लाख गीगाबाइट डेटा संग्रह की व्यवस्था की जा रही है, जिससे मशीन लर्निंग मॉडल को प्रशिक्षित किया जा सके।
यह डेटा पूर्व में किए गए पैथोलॉजी और इमेजिंग परीक्षणों से लिया जाएगा। इससे भविष्य की जांचों में तुलना और विश्लेषण अधिक सटीक तरीके से संभव होगा। संस्थान के टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ विभाग को इस परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।
जांच और उपचार में संभावित बदलाव
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई तकनीक का सबसे अधिक उपयोग पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी से जुड़ी जांचों में किया जा सकता है। पहले से संग्रहीत रिपोर्टों और छवियों का विश्लेषण कर नई जांच के परिणामों को तेजी से समझा जा सकेगा। इससे चिकित्सकों को निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
उदाहरण के तौर पर, किसी सर्जरी के संभावित परिणाम या दवा के प्रभाव का आकलन पहले से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किया जा सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि उपचार की सटीकता भी बढ़ेगी।
प्रशिक्षण और शोध पर जोर
इस परियोजना के तहत हर वर्ष लगभग एक हजार चिकित्सकीय पेशेवरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे डॉक्टरों और तकनीकी कर्मचारियों को नई तकनीक के उपयोग में दक्ष बनाया जाएगा। संस्थान का उद्देश्य केवल सेवाएं बेहतर करना ही नहीं, बल्कि अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा देना है।
चार चरणों में लागू होगी योजना
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले वर्ष में पायलट प्रोजेक्ट और प्रशासनिक स्वीकृतियों पर काम होगा। दूसरे वर्ष में सिस्टम का सत्यापन और विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। तीसरे वर्ष तक जांच और उपचार सेवाओं का अधिकांश हिस्सा एआई प्रणाली से जोड़ा जाएगा। चौथे और पांचवें वर्ष में इसे व्यापक रूप से लागू कर व्यावसायिक मॉडल की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी बदलाव समय की आवश्यकता है। उनका विश्वास है कि आने वाले वर्षों में इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी।



