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Vaibhav Suryavanshi Century South Africa: बल्ले से निकला दहकता लावा, 14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अफ्रीकी धरती पर मचाया कोहराम

Vaibhav Suryavanshi Century South Africa: दक्षिण अफ्रीका की सरजमीं पर भारत की युवा ब्रिगेड ने मेजबान टीम की बखिया उधेड़ दी है। तीन मैचों की यूथ वनडे सीरीज के आखिरी मुकाबले में भारतीय अंडर-19 टीम के कप्तान वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी से वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना बड़े-बड़े दिग्गज नहीं कर पाते। बेनोनी के मैदान पर महज 14 साल की उम्र में उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों के खिलाफ (Explosive Batting) का ऐसा नजारा पेश किया कि रिकॉर्ड बुक के पन्ने पलटने पड़ गए। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम के लिए वैभव किसी चक्रवात की तरह आए और मेजबान गेंदबाजों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।

Vaibhav Suryavanshi Century South Africa
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महज 63 गेंदों में शतकीय प्रहार: चौके-छक्कों की बरसात

वैभव सूर्यवंशी की पारी केवल एक शतक नहीं, बल्कि विपक्षी टीम के मनोबल पर किया गया एक गहरा प्रहार था। उन्होंने मात्र 63 गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया, जिसमें मैदान का कोई भी कोना ऐसा नहीं बचा जहां उन्होंने गेंद न भेजी हो। कप्तान वैभव ने कुल 74 गेंदों का सामना किया और (Century Performance) के दौरान 127 रनों की यादगार पारी खेली। उनकी इस पारी में 9 गगनचुंबी छक्के और 10 करारे चौके शामिल थे। महज 14 साल के इस बच्चे की ताकत और टाइमिंग को देखकर स्टेडियम में मौजूद दर्शक और अफ्रीकी खिलाड़ी दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए।

आरोन जॉर्ज और वैभव की 227 रनों की ऐतिहासिक ओपनिंग पार्टनरशिप

भारतीय पारी की शुरुआत जितनी धमाकेदार थी, उतनी ही स्थिर भी रही। वैभव सूर्यवंशी और उनके जोड़ीदार आरोन जॉर्ज ने पहले विकेट के लिए 227 रनों की विशाल साझेदारी की। इस (Opening Partnership) ने मुकाबले को पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका की पकड़ से बाहर कर दिया। दोनों बल्लेबाजों ने अफ्रीकी आक्रमण की धार को कुंद कर दिया और टीम इंडिया के लिए एक ऐसे विशाल स्कोर की नींव रखी, जिसका पीछा करना किसी भी टीम के लिए हिमालय फतह करने जैसा था। वैभव की आक्रामकता और जॉर्ज की सूझबूझ ने भारतीय खेमे में उत्साह भर दिया।

पांच अलग-अलग देशों में शतक जड़ने वाले सबसे युवा बल्लेबाज

वैभव सूर्यवंशी ने इस शतक के साथ एक ऐसी उपलब्धि अपने नाम कर ली है, जो महान सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली के नाम भी उनके शुरुआती दिनों में नहीं थी। वे दुनिया के सबसे कम उम्र के ऐसे बल्लेबाज बन गए हैं जिन्होंने पांच अलग-अलग देशों में शतकीय पारियां खेली हैं। दक्षिण अफ्रीका से पहले वैभव भारत, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में (Batting Record) अपने नाम कर चुके हैं। महज 14 वर्ष की आयु में अलग-अलग परिस्थितियों और पिचों पर जाकर शतक जड़ना वैभव की अद्भुत प्रतिभा और भविष्य के सुपरस्टार होने का पुख्ता प्रमाण देता है।

कप्तानी मिलते ही रचा इतिहास: अहमद शहजाद का रिकॉर्ड ध्वस्त

बीसीसीआई द्वारा वैभव को अंडर-19 टीम की कमान सौंपना एक साहसिक फैसला था, जिसे उन्होंने सही साबित कर दिखाया। वैभव सूर्यवंशी अब यूथ वनडे क्रिकेट के इतिहास में किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम की कमान संभालने वाले (Youngest Cricket Captain) बन गए हैं। इस मामले में उन्होंने पाकिस्तान के अहमद शहजाद के 17 साल पुराने रिकॉर्ड को मिट्टी में मिला दिया। शहजाद ने साल 2007 में 15 साल 141 दिन की उम्र में कप्तानी की थी, जबकि वैभव ने महज 14 साल की उम्र में यह जिम्मेदारी संभालकर विश्व स्तर पर अपनी धाक जमा ली है।

दूसरे यूथ वनडे में भी दिखाया था 283 का स्ट्राइक रेट

वैभव की यह फॉर्म अचानक नहीं आई है; वे पूरी सीरीज में अपनी आक्रामकता के लिए चर्चा में रहे हैं। दूसरे यूथ वनडे मुकाबले में भी उन्होंने महज 24 गेंदों में 68 रनों की तूफानी पारी खेली थी। उस दौरान (Strike Rate) 283.33 का रहा था, जिसमें उन्होंने 10 छक्के उड़ाए थे। उनकी बल्लेबाजी शैली आधुनिक युग के टी20 क्रिकेट और वनडे के आक्रामक प्रारूप का मिश्रण है। वैभव न केवल लंबी पारी खेलना जानते हैं, बल्कि वे जानते हैं कि कब और कैसे गेंदबाजों पर मानसिक दबाव बनाया जाता है।

भारतीय क्रिकेट का अगला ‘वंडर बॉय’ है वैभव सूर्यवंशी

क्रिकेट के पंडित वैभव की तुलना बचपन के सचिन तेंदुलकर से करने लगे हैं। 14 साल की उम्र में जिस तरह की परिपक्वता वे क्रीज पर दिखा रहे हैं, वह विरले ही देखने को मिलती है। उनकी (Cricket Career) की शुरुआत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे आने वाले समय में सीनियर टीम इंडिया के लिए एक बड़े दावेदार होंगे। वैभव का फुटवर्क और शॉर्ट्स का चयन उन्हें अपनी उम्र के अन्य खिलाड़ियों से बहुत आगे खड़ा करता है। दक्षिण अफ्रीका की उछाल भरी पिचों पर उनकी यह पारी लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

बीसीसीआई की खोज और भविष्य की रणनीतियां

बीसीसीआई के चयनकर्ताओं ने वैभव जैसी प्रतिभा को पहचान कर सही समय पर उन्हें एक्सपोजर दिया है। जिस तरह से वे विदेशी दौरों पर (International Exposure) प्राप्त कर रहे हैं, उससे उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इस सीरीज ने यह साबित कर दिया है कि भारत के पास युवा प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। वैभव की कप्तानी और उनकी बल्लेबाजी ने टीम इंडिया को सीरीज के निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस नन्हे कप्तान के अगले कदमों पर टिकी हैं।

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