T20WorldCup2026 – सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका से भारत की बड़ी हार
T20WorldCup2026 – टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण में भारत को अपने पहले ही मुकाबले में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस मैच में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 76 रनों से हराकर टूर्नामेंट में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। 188 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम 18.5 ओवर में 111 रन पर सिमट गई। यह हार केवल स्कोरबोर्ड तक सीमित नहीं रही, बल्कि टीम की रणनीति, संयम और संतुलन पर भी सवाल खड़े कर गई।

शुरुआत में लड़खड़ाया शीर्ष क्रम
भारतीय पारी की नींव पहले ही ओवर में हिल गई जब सलामी बल्लेबाज बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। शुरुआती झटका टीम के आत्मविश्वास पर साफ दिखा। तिलक वर्मा और अभिषेक शर्मा ने कुछ आकर्षक शॉट जरूर लगाए, लेकिन दोनों लंबी पारी नहीं खेल सके। पावरप्ले के दौरान लगातार विकेट गिरने से रन गति थम गई और दबाव मध्यक्रम पर आ गया। दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका भी 20 रन पर तीन विकेट गंवा चुका था, लेकिन उनके मध्यक्रम ने जिम्मेदारी संभाली, जबकि भारत 51 रन तक पहुंचते-पहुंचते पांच विकेट खो चुका था।
साझेदारियों की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
188 रन का लक्ष्य असंभव नहीं था, लेकिन इसके लिए संयम और साझेदारी की जरूरत थी। भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामकता दिखाने की कोशिश में जोखिम भरे शॉट खेले। परिणाम यह रहा कि कोई भी जोड़ी लंबी साझेदारी नहीं बना सकी। खास बात यह रही कि टीम के सभी दस विकेट कैच आउट हुए। इससे साफ है कि बल्लेबाजों ने मौके दक्षिण अफ्रीका को खुद दिए। रन चेज की रफ्तार कभी स्थिर नहीं हो सकी और मैच धीरे-धीरे हाथ से निकलता गया।
मध्य ओवरों में स्पिनरों का असर फीका
तेज गेंदबाजों ने शुरुआती सफलता दिलाई और विरोधी टीम को दबाव में डाला, लेकिन उसके बाद स्पिन आक्रमण से अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला। वरुण चक्रवर्ती ने अपने चार ओवर में 47 रन खर्च किए। चौथे ओवर में तीसरा विकेट गिरने के बाद दक्षिण अफ्रीका को अगला झटका 13वें ओवर में लगा। इस बीच डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस ने समझदारी और आक्रामकता का संतुलन बनाते हुए पारी को संभाल लिया। वॉशिंगटन सुंदर को सीमित ओवर मिले और वह भी असर नहीं छोड़ सके। मध्य ओवरों में विकेट न मिलना भारत के लिए निर्णायक साबित हुआ।
टीम चयन पर उठे सवाल
इस मुकाबले में उपकप्तान अक्षर पटेल को अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया गया। उनकी जगह वॉशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया, लेकिन यह फैसला चर्चा का विषय बन गया है। सुंदर गेंद और बल्ले दोनों से अपेक्षित योगदान नहीं दे पाए। टीम चार तेज गेंदबाजों और दो स्पिनरों के साथ उतरी, लेकिन स्पिन से अपेक्षित फायदा नहीं मिला। दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका के स्पिनरों ने सीमित ओवरों में प्रभाव डाला। केशव महाराज ने तीन विकेट लेकर मैच का रुख बदल दिया, जबकि एडेन मार्करम ने भी किफायती गेंदबाजी की।
डेथ ओवरों में नियंत्रण खोया
दक्षिण अफ्रीका की पारी के अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाजों की लय बिगड़ गई। एक ओवर में 20 रन जाने से विपक्षी टीम को अतिरिक्त बढ़त मिल गई। मिलर ने 63 रन और ब्रेविस ने 45 रन की अहम पारियां खेलीं, जबकि ट्रिस्टन स्टब्स ने अंत में तेजी से रन जोड़कर स्कोर 187 तक पहुंचा दिया। शुरुआती दबाव को आखिर तक बनाए रखने में भारतीय गेंदबाज असफल रहे।
ओपनिंग जोड़ी की लगातार नाकामी
टीम इंडिया के लिए सलामी बल्लेबाजी इस टूर्नामेंट में चिंता का विषय बनी हुई है। पांच मैचों में ओपनिंग जोड़ी से कुल मिलाकर 34 रन ही मिले हैं। जब भी शुरुआत कमजोर होती है, मध्यक्रम पर दबाव बढ़ जाता है। इस मैच में भी यही तस्वीर देखने को मिली। मजबूत शुरुआत के अभाव में पूरी पारी अस्थिर रही।
बाएं हाथ के बल्लेबाजों का संतुलन चर्चा में
भारतीय बल्लेबाजी क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या अधिक है। भारतीय परिस्थितियों में स्पिन को मिलने वाली थोड़ी सी भी मदद विपक्षी ऑफ स्पिनरों को फायदा दे सकती है। दक्षिण अफ्रीका ने इसका इस्तेमाल किया और शुरुआती ओवरों में दबाव बना दिया। रणनीतिक संतुलन की कमी यहां भी महसूस हुई।
आगे की राह आसान नहीं
यह हार केवल एक खराब दिन की कहानी नहीं कही जा सकती। बल्लेबाजी में संयम की कमी, गेंदबाजी में निरंतरता का अभाव और टीम संयोजन के फैसले मिलकर भारी पड़े। सुपर-8 चरण में अब भारत को जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले खेलने हैं। इनमें से किसी भी मैच में चूक टीम के अभियान को यहीं रोक सकती है। ऐसे में टीम प्रबंधन को संयम, संतुलन और स्पष्ट रणनीति के साथ उतरना होगा।



