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T20WorldCup – जिम्बाब्वे मुकाबले से पहले टीम चयन पर बहस तेज

T20WorldCup – टी20 विश्व कप के अहम दौर में भारतीय टीम एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर फैसला आगे की राह तय करेगा। जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाला मुकाबला सिर्फ एक और लीग मैच नहीं, बल्कि सेमीफाइनल की उम्मीदों से जुड़ा निर्णायक संघर्ष बन चुका है। हालिया हार के बाद टीम पर दबाव बढ़ा है और सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की फॉर्म को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, क्रिकेट जगत के कुछ जानकार इस समय धैर्य बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।

अभिषेक की फॉर्म पर उठते सवाल

पिछली कुछ पारियों में अभिषेक शर्मा का बल्ला उम्मीद के मुताबिक नहीं चला है। शुरुआती मैचों में आक्रामक अंदाज दिखाने वाले इस युवा बल्लेबाज ने हाल के मुकाबलों में रन बनाने के लिए संघर्ष किया है। ऐसे में सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट विश्लेषण कार्यक्रमों तक, उन्हें टीम से बाहर करने की मांग उठी। लेकिन टीम प्रबंधन फिलहाल किसी जल्दबाजी के मूड में नहीं दिखता। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे प्रारूप में कुछ मैचों की नाकामी किसी खिलाड़ी की क्षमता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकती।

आकाश चोपड़ा ने किया खुला समर्थन

पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने अभिषेक के पक्ष में मजबूती से अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि हालिया खराब प्रदर्शन के बावजूद खिलाड़ी की लंबी अवधि की उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले डेढ़ साल में अभिषेक ने लगातार प्रभावशाली बल्लेबाजी की है, जिसके दम पर वह शीर्ष रैंकिंग तक पहुंचे। चोपड़ा के मुताबिक, अगर कोई टीम विश्व विजेता रही है और लंबे समय तक नंबर एक स्थान पर बनी रही है, तो वह सिर्फ किस्मत का परिणाम नहीं होता। ऐसे में मुश्किल वक्त में खिलाड़ी का साथ छोड़ना सही रणनीति नहीं होगी।

विपक्ष की रणनीति और तकनीकी चुनौती

चोपड़ा ने यह भी संकेत दिया कि विरोधी टीमें अभिषेक के खिलाफ विशेष योजना के तहत गेंदबाजी कर रही हैं। ऑफ स्टंप से दूर धीमी गेंदें और नियंत्रित लाइन-लेंथ ने उन्हें खुलकर शॉट खेलने का मौका नहीं दिया। उनका मानना है कि जिम्बाब्वे के गेंदबाज शॉर्ट पिच गेंदों से भी उन्हें परखने की कोशिश करेंगे। ऐसे में चुनौती सिर्फ रन बनाने की नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने की भी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अभिषेक शुरुआती कुछ ओवर संभलकर खेलें, तो वह फिर से लय हासिल कर सकते हैं।

ओपनिंग जोड़ी पर बदलाव की चर्चा

टीम संयोजन को लेकर भी बहस तेज है। कुछ लोग ओपनिंग में बदलाव की वकालत कर रहे हैं, लेकिन चोपड़ा इसके पक्ष में नहीं हैं। उनका तर्क है कि ईशान किशन और अभिषेक की जोड़ी ने कई मौकों पर टीम को मजबूत शुरुआत दी है। ऐसे में एक-दो असफल पारियों के आधार पर संयोजन बदलना जोखिम भरा हो सकता है। उनका मानना है कि निरंतरता ही बड़े टूर्नामेंट में सफलता की कुंजी होती है।

संजू सैमसन को लेकर संभावनाएं

संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने की चर्चा भी चल रही है। हालांकि सुझाव यह दिया गया है कि अगर उन्हें मौका मिले तो वह नंबर तीन पर उतरें। ईशान किशन को नीचे भेजने का विचार कई विशेषज्ञों को तर्कसंगत नहीं लगता, क्योंकि उन्होंने अब तक टीम के लिए अहम पारियां खेली हैं। टीम प्रबंधन के सामने संतुलन बनाने की चुनौती है, जहां फॉर्म, अनुभव और परिस्थिति तीनों का ध्यान रखना होगा।

सेमीफाइनल की राह और मानसिक तैयारी

जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबला सिर्फ अंक तालिका का खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की परीक्षा भी है। भारतीय टीम को संयम और स्पष्ट रणनीति के साथ मैदान पर उतरना होगा। बड़े टूर्नामेंट में अक्सर वही टीमें आगे बढ़ती हैं जो दबाव में भी संतुलित फैसले लेती हैं। खिलाड़ियों के लिए यह समय एकजुट होकर प्रदर्शन करने का है, क्योंकि एक जीत पूरे अभियान की दिशा बदल सकती है।

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