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ShivamDube – नीदरलैंड के खिलाफ दमदार पारी, धोनी को दिया श्रेय

ShivamDube – नीदरलैंड के खिलाफ अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारतीय ऑलराउंडर शिवम दुबे ने 66 रन की आक्रामक पारी खेलकर टीम की जीत में अहम योगदान दिया। छह छक्कों से सजी इस पारी ने भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई। मैच के बाद दुबे ने अपनी बल्लेबाजी में आए बदलाव का श्रेय पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को दिया।

मध्यक्रम की जिम्मेदारी निभा रहे दुबे

टी20 प्रारूप में पिछले कुछ समय से शिवम दुबे भारतीय मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में उभरे हैं। वह सिर्फ बड़े शॉट लगाने के लिए नहीं जाने जाते, बल्कि परिस्थिति के अनुसार सिंगल-डबल लेकर पारी को संभालने की क्षमता भी दिखा रहे हैं। नीदरलैंड के खिलाफ जब टीम को तेज रन गति की जरूरत थी, तब दुबे ने आक्रामक रुख अपनाया और दबाव को विपक्षी गेंदबाजों पर डाल दिया।

धोनी की सलाह से बदली बल्लेबाजी

मैच के बाद बातचीत में दुबे ने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्हें तेज गेंदबाजों के सामने मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में वह हर गेंद को बड़े शॉट में बदलने की कोशिश करते थे, जिससे निरंतरता प्रभावित होती थी।

दुबे ने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान महेंद्र सिंह धोनी से मिली सलाह उनके लिए निर्णायक साबित हुई। धोनी ने उन्हें समझाया कि हर गेंद पर छक्का लगाना जरूरी नहीं होता। परिस्थिति के अनुसार स्ट्राइक रोटेशन और समझदारी से बल्लेबाजी करना उतना ही महत्वपूर्ण है।

ऑफ-सीजन की मेहनत का मिला फायदा

दुबे के मुताबिक, उन्होंने ऑफ-सीजन के दौरान अपनी कमजोरियों पर खास ध्यान दिया। तेज गेंदबाजों के खिलाफ शॉट चयन और टाइमिंग सुधारने के लिए उन्होंने अतिरिक्त अभ्यास किया। अब वह अच्छी गेंद मिलने पर आक्रमण करते हैं, जबकि मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य रखते हुए रन जुटाते हैं।

उन्होंने बताया कि पारी की शुरुआत में उनका ध्यान “स्मार्ट इंटेंट” पर रहता है। यदि विकेट गिरते हैं तो वह क्रीज पर टिककर साझेदारी बनाने की कोशिश करते हैं। वहीं, डेथ ओवर्स में जरूरत पड़ने पर स्वाभाविक रूप से आक्रामक हो जाते हैं।

दबाव में संतुलित सोच

दुबे ने दबाव से निपटने के सवाल पर कहा कि वह मैच की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करते हैं, न कि बाहरी परिस्थितियों पर। उनका मानना है कि अगर बल्लेबाज अंत तक क्रीज पर बना रहे तो अंतिम ओवरों में टीम के लिए जरूरी रन जोड़े जा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बीच के ओवरों में अनावश्यक जोखिम लेने से बचना चाहिए। यदि टीम को स्थिरता की जरूरत हो तो स्ट्राइक रोटेट करना बेहतर विकल्प होता है। लेकिन यदि मजबूत मंच तैयार हो, तो पहली ही गेंद से आक्रामक खेलना भी जरूरी है।

जीत में निर्णायक योगदान

नीदरलैंड के खिलाफ उनकी पारी ने भारत को प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचाया, जिसे गेंदबाजों ने सफलतापूर्वक बचाव किया। इस प्रदर्शन के साथ दुबे ने एक बार फिर साबित किया कि वह टी20 टीम में सिर्फ पावर हिटर नहीं, बल्कि परिस्थितियों को समझकर खेलने वाले परिपक्व बल्लेबाज के रूप में अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं।

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