Cricket Performance Review 2026: विराट ने शतक जड़कर मचाई खलबली, गावस्कर बोले- सीखो रन बनाने की कला…
Cricket Performance Review 2026: भारतीय क्रिकेट के किंग कहे जाने वाले विराट कोहली इस समय अपने करियर के उस पड़ाव पर हैं, जहां उनका बल्ला आग उगल रहा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में कोहली ने जो पारी खेली, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों उन्हें दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माना जाता है। इस रोमांचक मुकाबले में (Virat Kohli batting technique) का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब उन्होंने कीवी गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। इंदौर की पिच पर विराट के बल्ले से निकला हर शॉट उनकी कड़ी मेहनत और एकाग्रता की कहानी बयां कर रहा था।

जब शतक भी न बचा सका टीम इंडिया की लाज
कोहली ने इस मैच में 108 गेंदों का सामना करते हुए शानदार 124 रनों की पारी खेली, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। भारतीय टीम 338 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा कर रही थी, और विराट अकेले एक छोर थामे खड़े थे। हालांकि (Indian cricket team series defeat) का कड़वा घूंट पीना पड़ा क्योंकि टीम इंडिया यह मुकाबला 41 रनों से हार गई। इस हार के साथ ही भारत ने यह सीरीज 1-2 से गंवा दी, जिससे प्रशंसकों में निराशा छा गई, लेकिन कोहली की व्यक्तिगत उपलब्धि ने सबका दिल जीत लिया।
सुनील गावस्कर ने खोला कोहली की सफलता का राज
दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने विराट की इस पारी के बाद उनकी मानसिकता की जमकर तारीफ की है। गावस्कर का मानना है कि विराट की सबसे बड़ी ताकत उनकी तकनीक से ज्यादा उनकी मानसिक मजबूती है। वह किसी खास इमेज में बंधकर नहीं खेलते, बल्कि (consistency in ODI cricket) को प्राथमिकता देते हैं। गावस्कर के अनुसार, विराट इस बात की परवाह नहीं करते कि लोग उनसे क्या उम्मीद कर रहे हैं, उनका पूरा ध्यान केवल परिस्थिति के अनुसार रन बनाने पर होता है।
क्यों फेल हुआ टीम इंडिया का चेज मास्टर प्लान
गावस्कर ने मैच के बाद टीम इंडिया की हार का गहरा विश्लेषण करते हुए बताया कि आखिर कमी कहां रह गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि विराट को दूसरे छोर से वैसा सहयोग नहीं मिला जैसा एक बड़े लक्ष्य का पीछा करने के लिए जरूरी होता है। इस (top order batting failure) की वजह से पूरी टीम दबाव में आ गई। क्रिकेट में कहा जाता है कि अगर शुरुआत अच्छी हो तो आधा काम हो जाता है, लेकिन भारतीय ओपनर्स ने इस पूरी सीरीज में टीम को वह ठोस आधार नहीं दिया जिसकी सख्त जरूरत थी।
अनुभव की कमी और केएल राहुल की खली कमी
मिडिल ऑर्डर में भारत को केएल राहुल जैसे अनुभवी खिलाड़ी की कमी बहुत ज्यादा खली, जो फॉर्म में होने के बावजूद टीम का हिस्सा नहीं थे। उनकी गैरमौजूदगी में नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा जैसे युवा खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ गया। हालांकि रेड्डी ने 53 रनों की जुझारू पारी खेली, लेकिन (youth players performance analysis) यह बताता है कि अभी उन्हें अंतरराष्ट्रीय दबाव झेलने के लिए और अनुभव की जरूरत है। हर्षित राणा से भी उस निरंतरता की उम्मीद नहीं की जा सकती थी, जो एक अनुभवी ऑलराउंडर से होती है।
कोहली की निडर मानसिकता और रन बनाने की भूख
विराट कोहली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे कभी अपनी बनाई हुई छवि के बोझ तले नहीं दबते। गावस्कर ने कहा कि कई खिलाड़ी यह सोचते रहते हैं कि दर्शक उनसे हर गेंद पर छक्का मारते देखना चाहते हैं, लेकिन कोहली (match situation awareness) के साथ खेलते हैं। वे जानते हैं कि कब स्ट्राइक रोटेट करनी है और कब आक्रामक रुख अपनाना है। उनकी यही सोच उन्हें दूसरों से अलग बनाती है और उन्हें एक रन मशीन में तब्दील कर देती है।
युवाओं के लिए विराट की पाठशाला से सबसे बड़ा सबक
सुनील गावस्कर ने देश के उभरते हुए युवा क्रिकेटरों को विराट कोहली के पदचिह्नों पर चलने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को कोहली से यह सीखना चाहिए कि कैसे अंतिम समय तक हार नहीं मानी जाती। कोहली ने मैच की आखिरी गेंद तक प्रयास किया, जो उनकी जुझारू प्रवृत्ति को दर्शाता है। अगर युवा खिलाड़ी (cricket player mental toughness) को अपने खेल में शामिल कर लें, तो वे भी कोहली की तरह निरंतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं।
भविष्य की चुनौतियां और टीम इंडिया का रोडमैप
भले ही भारत ने यह सीरीज गंवा दी हो, लेकिन विराट कोहली की फॉर्म आगामी टूर्नामेंट्स के लिए एक शुभ संकेत है। टीम इंडिया को अब अपनी शुरुआती साझेदारी और मध्यक्रम की स्थिरता पर गंभीरता से विचार करना होगा। कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ियों का (professional sports commitment) ही टीम को आने वाले विश्व आयोजनों में जीत की राह पर ले जा सकता है। अब समय आ गया है कि टीम के युवा सितारे कोहली के अनुभव से सीखें और अपनी गलतियों को सुधारें।



