BrianBennett – जिम्बाब्वे क्रिकेट की नई उम्मीद बनकर उभरे युवा बल्लेबाज
BrianBennett – जिम्बाब्वे क्रिकेट लंबे समय से संघर्ष के दौर से गुजर रहा था। बड़े नाम धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय मंच से विदा हो चुके थे और टीम को नए चेहरों की तलाश थी। ऐसे माहौल में 22 वर्षीय ब्रायन बेनेट का उभार किसी ताज़ी हवा के झोंके जैसा है। हरारे के एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने विश्व मंच पर अपनी पहचान बनाई है। मौजूदा टी20 विश्वकप में उनका प्रदर्शन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे की वापसी का संकेत भी है जिसकी जिम्बाब्वे क्रिकेट को सख्त जरूरत थी।

टूर्नामेंट में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन
टी20 विश्वकप के इस संस्करण में बेनेट ने जो निरंतरता दिखाई है, वह किसी भी युवा बल्लेबाज के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। पांच पारियों में 277 रन बनाकर वह सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं। उनकी औसत 277 रही और स्ट्राइक रेट 135 से ऊपर। तीन अर्धशतक और कई मैचों में नाबाद लौटना उनकी परिपक्वता को दर्शाता है।
भारत के खिलाफ 59 गेंदों पर नाबाद 97 रन की पारी खास चर्चा में रही। इस दौरान उन्होंने आठ चौके और छह छक्के लगाए। उल्लेखनीय यह है कि टूर्नामेंट की अन्य पारियों में उन्होंने जोखिम कम लिया, लेकिन भारत जैसी मजबूत गेंदबाजी इकाई के सामने जरूरत पड़ने पर आक्रामकता भी दिखाई।
ओपनिंग में स्थिरता और संयम
बेनेट को कई मुकाबलों में पारी की शुरुआत की जिम्मेदारी दी गई। पांच में से चार पारियों में वे नाबाद लौटे। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि वह केवल तेजी से रन बनाने वाले बल्लेबाज नहीं, बल्कि पारी को संभालकर अंत तक ले जाने की क्षमता भी रखते हैं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच रन पर आउट होने के अलावा बाकी मुकाबलों में उन्होंने टीम को मजबूत आधार दिया। उनकी पारियां 48*, 64*, 63* और 97* रहीं। इतनी कम उम्र में यह संतुलन दिखाना असाधारण माना जा रहा है।
घर के पिछवाड़े से शुरू हुई कहानी
ब्रायन की क्रिकेट यात्रा किसी नामी अकादमी से नहीं, बल्कि घर के पीछे लगे छोटे से नेट से शुरू हुई। उनके पिता, जो क्लब स्तर पर क्रिकेट खेल चुके हैं, ने बेटों के अभ्यास के लिए घर पर ही व्यवस्था की थी। स्कूल के बाद ब्रायन और उनके जुड़वां भाई घंटों अभ्यास करते थे।
उन्होंने एक प्रशिक्षण शिविर के दौरान बताया था कि बचपन में वह पेशेवर क्रिकेट को गंभीरता से नहीं देखते थे। अंडर-19 स्तर पर पहुंचने के बाद ही उन्होंने राष्ट्रीय टीम को नजदीक से फॉलो करना शुरू किया। यही वह दौर था जब उनके भीतर लक्ष्य स्पष्ट हुआ।
बहुआयामी खेल से मिली मजबूती
क्रिकेट के अलावा बेनेट ने हॉकी, रग्बी और स्क्वैश भी खेला। स्कूल में अलग-अलग खेलों में भाग लेने से उनकी फिटनेस और मानसिक मजबूती विकसित हुई। कोविड काल में प्रतिस्पर्धी मैच कम हो गए तो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के किंग्सवुड कॉलेज में दाखिला लेकर अपने खेल को निखारा। वहां नियमित मुकाबलों ने उन्हें आत्मविश्वास दिया।
अंडर-19 से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक
2022 अंडर-19 विश्व कप उनके करियर का अहम पड़ाव रहा। पाकिस्तान के खिलाफ 83 रन और वेस्टइंडीज के खिलाफ शतकीय साझेदारी ने उन्हें पहचान दिलाई। दिसंबर 2023 में टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण के बाद उन्होंने तीनों प्रारूपों में शतक लगाने का कारनामा किया। वह ब्रेंडन टेलर और सिकंदर रजा के बाद ऐसा करने वाले चुनिंदा जिम्बाब्वे खिलाड़ियों में शामिल हैं।
इंग्लैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज में 139 रन की टेस्ट पारी ने उनके नाम को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया। उस ऐतिहासिक मैच में उन्होंने धैर्य और तकनीक दोनों का संतुलन दिखाया।
नेतृत्व और अतिरिक्त जिम्मेदारी
बेनेट केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं हैं। घरेलू क्रिकेट में वह नियमित रूप से गेंदबाजी भी करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी टी20 में उनके नाम छह विकेट दर्ज हैं। टेस्ट और वनडे में उन्हें उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई है।
उनका कहना है कि नेतृत्व सीखने की प्रक्रिया है और वह वरिष्ठ खिलाड़ियों से मार्गदर्शन लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
भविष्य की दिशा और लक्ष्य
मैदान के बाहर ब्रायन सादगी भरा जीवन पसंद करते हैं। परिवार के फार्महाउस पर समय बिताना और गोल्फ खेलना उन्हें सुकून देता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका अगला लक्ष्य जिम्बाब्वे को नियमित रूप से बड़े टूर्नामेंटों में प्रतिस्पर्धी बनाना है।
टी20 विश्वकप 2026 जिम्बाब्वे के लिए नए अध्याय की शुरुआत जैसा दिख रहा है। टीम पिछले कुछ वर्षों में बड़े मंचों से दूर रही, लेकिन बेनेट जैसे युवा खिलाड़ियों का उभार बदलाव का संकेत दे रहा है। उनके प्रदर्शन ने यह विश्वास जगाया है कि जिम्बाब्वे क्रिकेट फिर से मजबूती की राह पर लौट सकता है।



