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ThirdGenderVoting – पश्चिम बंगाल में थर्ड जेंडर मतदाताओं ने बनाया नया रिकॉर्ड

ThirdGenderVoting – देश में चुनावी भागीदारी को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में थर्ड जेंडर मतदाताओं ने बड़ी संख्या में मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, दूसरे चरण में इस वर्ग का मतदान प्रतिशत 91.28 रहा, जो हाल के वर्षों में दर्ज सबसे उल्लेखनीय आंकड़ों में शामिल है। पहले चरण में यह प्रतिशत 56.79 था, लेकिन दूसरे चरण में इसमें काफी बढ़ोतरी देखने को मिली।

पश्चिम बंगाल में बढ़ी भागीदारी

चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में दो चरणों के दौरान कुल 1,257 थर्ड जेंडर मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनमें पहले चरण में 465 और दूसरे चरण में 792 मतदाता शामिल रहे। मतदान प्रतिशत में आई इस वृद्धि को चुनाव विशेषज्ञ सामाजिक जागरूकता और चुनावी प्रक्रियाओं में बढ़ती भागीदारी का संकेत मान रहे हैं। राज्य में अलग-अलग चरणों में हुए मतदान के दौरान निर्वाचन अधिकारियों ने भी समावेशी मतदान को बढ़ावा देने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं।

पुदुचेरी ने दर्ज किया सबसे अधिक मतदान

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में पुदुचेरी ने थर्ड जेंडर मतदाताओं के बीच सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज किया। यहां इस श्रेणी में पंजीकृत 139 मतदाताओं में से 91.81 प्रतिशत ने वोट डाला। यह आंकड़ा देशभर में सबसे ऊंचा माना जा रहा है। वहीं तमिलनाडु में 7,728 पंजीकृत थर्ड जेंडर मतदाताओं में से 60.49 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया। केरल में 277 मतदाताओं में से 57.04 प्रतिशत और असम में 343 में से 36.84 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला।

अलग-अलग राज्यों में अलग तारीखों पर हुआ मतदान

इन राज्यों में चुनाव अलग-अलग चरणों और तारीखों में आयोजित किए गए थे। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान हुआ, जबकि केरल, असम और पुदुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग कराई गई थी। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान हुआ। चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट किया था कि सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

लोकसभा चुनाव के आंकड़ों से अलग तस्वीर

अगर हालिया विधानसभा चुनावों की तुलना पिछले लोकसभा चुनावों से की जाए तो भागीदारी को लेकर मिश्रित स्थिति दिखाई देती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में थर्ड जेंडर मतदाताओं का पंजीकरण बढ़कर 48,194 तक पहुंच गया था, जो 2019 के मुकाबले करीब 23.5 प्रतिशत अधिक था। हालांकि, मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा। कुल पंजीकृत मतदाताओं में से केवल 13,058 लोगों ने मतदान किया, जो लगभग 27 प्रतिशत के बराबर था।

चुनाव आयोग की पहल से बढ़ा प्रतिनिधित्व

थर्ड जेंडर समुदाय को मतदाता सूची में अलग पहचान दिलाने की दिशा में चुनाव आयोग की पहल को महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला के कार्यकाल में इस वर्ग को ‘अन्य’ या ‘O’ श्रेणी के तहत पंजीकरण की सुविधा दी गई थी। इसके बाद से निर्वाचन आयोग मतदाताओं को पुरुष, महिला और अन्य श्रेणियों में दर्ज करता है। इस कदम को लोकतांत्रिक व्यवस्था में समान भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में अहम बदलाव माना जाता है।

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