Telangana Police: तेलंगाना में नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग से अपराध रिपोर्टिंग होगी आसान और सुरक्षित
Telangana Police: तेलंगाना पुलिस कानून व्यवस्था को और अधिक सुलभ बनाने के लिए एक नया नागरिक-केंद्रित सिस्टम लागू करने जा रही है। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों, पोक्सो केस, अत्याचार निवारण कानून और बाल विवाह निषेध कानून के तहत मामलों में पीड़ितों के लिए प्राथमिकी दर्ज करना आसान बनाना है। नए सिस्टम के तहत पीड़ित को पुलिस स्टेशन आने की आवश्यकता नहीं होगी और शिकायत उनके घर या किसी सुरक्षित स्थान पर दर्ज की जाएगी। यह पहल 27 जनवरी से आधिकारिक रूप से शुरू की जा रही है।

नागरिक-केंद्रित मॉडल का महत्व
सीआईजी की अतिरिक्त डीजीपी चारू सिन्हा के अनुसार, यह सिस्टम विशेष रूप से संवेदनशील अपराधों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। ऐसे मामलों में पीड़ित या सूचना देने वाले अक्सर मानसिक या शारीरिक रूप से पुलिस स्टेशन जाने के लिए सक्षम नहीं होते। नई प्रक्रिया में पुलिस मशीनरी सीधे पीड़ित के पास जाएगी और प्राथमिक जानकारी इकट्ठा करेगी।
कौन-कौन से अपराध शामिल हैं
इस पहल के तहत महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, पोक्सो एक्ट के तहत अपराध, एससा/एसटी एक्ट के तहत अत्याचार, बाल विवाह निषेध कानून के तहत अपराध, और तेलंगाना रैगिंग निषेध एक्ट के तहत अपराध शामिल हैं। इन अपराधों में पीड़ित अक्सर असुरक्षित या संवेदनशील स्थिति में होते हैं, और उन्हें स्टेशन आने में कठिनाई होती है।
प्रक्रिया कैसे काम करेगी
नागरिक-केंद्रित प्रक्रिया के तहत, जब भी इन अपराधों के बारे में टेलीफोन या मौखिक सूचना प्राप्त होगी, संबंधित पुलिस अधिकारी पीड़ित के घर, अस्पताल, अपराध स्थल या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर जाएंगे। वहां पीड़ित या घटना के बारे में जानकारी रखने वाले किसी अन्य व्यक्ति से शिकायत दर्ज की जाएगी।
प्राथमिकी की कॉपी घर पर ही मिलेगी
इस नई प्रक्रिया में प्राथमिकी की कॉपी भी पीड़ित को उनके घर या पसंदीदा स्थान पर दी जाएगी। पीड़ित को पुलिस स्टेशन आने की आवश्यकता नहीं होगी। जहां ज़रूरी हो, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 180 और 183 के तहत बयान भी उसी जगह रिकॉर्ड किए जाएंगे।
प्रशिक्षण और लॉन्च
अधिकारियों को इस नए सिस्टम के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद यह नागरिक-केंद्रित मॉडल 27 जनवरी से पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील, सुरक्षित और पीड़ित-मित्र बनाने का है।
अपेक्षित लाभ
इस पहल से पीड़ितों का भय और मानसिक तनाव कम होगा, पुलिसिंग प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक होगी, और संवेदनशील मामलों में अपराध की त्वरित रिपोर्टिंग संभव होगी। पुलिस और नागरिकों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



