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SupremeCourt – टेरर फंडिंग मामले में शब्बीर अहमद शाह को मिली जमानत

SupremeCourt – कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली। सर्वोच्च न्यायालय ने लंबे समय से न्यायिक हिरासत में बंद शाह को जमानत देने का फैसला सुनाया। शाह को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जून 2019 में गिरफ्तार किया था और तब से वे इस मामले में जेल में बंद थे। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल की प्रक्रिया में हुई देरी और कुछ प्रक्रियागत पहलुओं पर भी टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने सुनवाई के बाद कहा कि आरोपी को जमानत दी जा रही है, हालांकि विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत कुछ शर्तों के साथ प्रभावी होगी।

पीठ ने संकेत दिया कि अंतिम आदेश में जमानत से जुड़ी शर्तों और अन्य आवश्यक निर्देशों का विस्तार से उल्लेख किया जाएगा।

बचाव पक्ष ने उठाया लंबी हिरासत का मुद्दा

सुनवाई के दौरान शब्बीर अहमद शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि शाह पिछले कई वर्षों से जेल में हैं और मामले का ट्रायल अभी भी पूरा नहीं हो सका है। उनके अनुसार मुकदमे की प्रक्रिया काफी लंबी खिंच चुकी है, जिससे आरोपी की लंबी न्यायिक हिरासत का प्रश्न उठता है।

बचाव पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया कि इस परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए।

जांच एजेंसी ने किया जमानत का विरोध

दूसरी ओर, राष्ट्रीय जांच एजेंसी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है और इसकी जांच लंबे समय से चल रही है।

एनआईए का कहना था कि यह मामला कश्मीर में कथित तौर पर अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने से संबंधित है। एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया कि मामले की प्रकृति को देखते हुए जमानत देने से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाए।

ट्रायल में देरी पर अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल की प्रक्रिया को लेकर भी कुछ सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि मुकदमे की कार्यवाही अपेक्षा से अधिक लंबी हो गई है और आरोपी कई वर्षों से हिरासत में है।

पीठ ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इसी पृष्ठभूमि में अदालत ने फिलहाल आरोपी को जमानत देने का निर्णय लिया।

2019 में एनआईए ने की थी गिरफ्तारी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 4 जून 2019 को शब्बीर अहमद शाह को टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप था कि यह मामला कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर वित्तीय संसाधन जुटाने से संबंधित है।

इस मामले की जांच पिछले कई वर्षों से चल रही है और अदालत में इसकी सुनवाई भी जारी है। जांच एजेंसी ने इस दौरान कई दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। हालांकि मुकदमे की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

आगे जारी होगा विस्तृत आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमानत देने का निर्णय फिलहाल सुनाया गया है और विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा। उसी आदेश में जमानत की शर्तें और अन्य कानूनी निर्देश स्पष्ट किए जाएंगे।

फिलहाल अदालत के इस फैसले से शब्बीर अहमद शाह को लंबे समय बाद कानूनी राहत मिली है, जबकि मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

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