SupremeCourt – हरियाणा केस में पुलिस के रवैये पर अदालत की कड़ी टिप्पणी
SupremeCourt – सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में तीन साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस और संबंधित संस्थाओं के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि जिस तरह से इस संवेदनशील मामले को संभाला गया, वह न केवल चिंताजनक है बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि इतनी छोटी बच्ची को थाने बुलाया गया, जबकि अधिकारियों को स्वयं उसके पास जाना चाहिए था।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने हरियाणा पुलिस की प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी होती है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि एक नाबालिग पीड़िता के साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। न्यायाधीशों ने कहा कि कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि बच्चों से जुड़े अपराधों में मानवीय दृष्टिकोण सर्वोपरि होना चाहिए।
बाल कल्याण समिति को भी लगाई फटकार
इस मामले में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि बाल कल्याण समिति की भूमिका पर भी अदालत ने सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि समिति का दायित्व है कि वह पीड़ित बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति का ध्यान रखे, लेकिन यहां अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। अदालत के अनुसार, ऐसी संस्थाओं का उद्देश्य पीड़ित को सहारा देना होता है, न कि उसे अतिरिक्त मानसिक दबाव में डालना।
पहले भी अदालत जता चुकी है नाराजगी
इससे पहले 23 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया था। तब अदालत ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला था कि कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं करेगा।
संवेदनशील मामलों में प्रक्रिया सुधार की जरूरत
अदालत की टिप्पणियों ने एक बार फिर यह मुद्दा सामने ला दिया है कि बच्चों से जुड़े अपराधों की जांच और सुनवाई में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं में पुलिस और अन्य संस्थाओं को प्रशिक्षित तरीके से काम करना चाहिए, ताकि पीड़ित पर किसी तरह का अतिरिक्त मानसिक दबाव न पड़े।
सुनवाई जारी, आगे की कार्रवाई पर नजर
इस मामले की सुनवाई अभी जारी है और आने वाले दिनों में अदालत इस पर और निर्देश दे सकती है। न्यायालय की सख्त टिप्पणियों के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि संबंधित एजेंसियां अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएंगी और भविष्य में ऐसे मामलों को अधिक संवेदनशीलता के साथ संभालेंगी।



