ShivajiJayanti – महाराष्ट्र में श्रद्धा के साथ मनाई गई शिवाजी जयंती
ShivajiJayanti – महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर गुरुवार को पूरे राज्य में श्रद्धा और गर्व का माहौल दिखाई दिया। ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर सरकारी कार्यक्रमों तक, हर जगह मराठा साम्राज्य के संस्थापक को याद किया गया। राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनके साहस, दूरदर्शिता और जनकल्याण की भावना को नमन किया। शिवाजी महाराज का जन्म वर्ष 1630 में पुणे जिले की जुन्नार तहसील स्थित शिवनेरी किले में हुआ था, जो आज भी उनकी स्मृतियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

शिवनेरी किले में श्रद्धांजलि कार्यक्रम
पुणे के शिवनेरी किले में आयोजित मुख्य समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार ने पहुंचकर छत्रपति शिवाजी महाराज को पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान पारंपरिक तरीके से सम्मान समारोह आयोजित किया गया। राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल प्रशासक और दूरदर्शी शासक भी थे। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों और इतिहास प्रेमियों की भी बड़ी संख्या मौजूद रही।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश जारी कर शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि शिवाजी महाराज ने सदैव जनता के हित को सर्वोपरि रखा और उनकी सुरक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि उनका जीवन आज भी देश के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है। उनके विचार और आदर्श वर्तमान समय में भी प्रासंगिक हैं, विशेषकर जब बात सुशासन और जनहित की आती है।
राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन्हें शौर्य और न्यायप्रिय नेतृत्व का प्रतीक बताया। राहुल गांधी ने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संदेश में उन्हें मराठा साम्राज्य के संस्थापक और भारत के प्रेरणास्रोत के रूप में याद किया। प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी उन्हें सामाजिक न्याय, उदारता और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक बताया।
इतिहास में शिवाजी महाराज का स्थान
भारतीय इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम अद्वितीय सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने उस दौर में स्वराज की नींव रखी, जब विदेशी सत्ता का प्रभाव बढ़ रहा था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने रणनीति और साहस के बल पर मजबूत शासन व्यवस्था स्थापित की। उनके प्रशासन में किसानों और आम जनता के हितों को विशेष महत्व दिया गया। यही कारण है कि वे केवल एक क्षेत्रीय शासक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक माने जाते हैं।
जनभावनाओं में जीवंत विरासत
महाराष्ट्र ही नहीं, देश के विभिन्न हिस्सों में भी शिवाजी महाराज की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और सांस्कृतिक संगठनों ने उनकी जीवनी पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया। युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया। इतिहासकारों का मानना है कि शिवाजी महाराज की नीतियां और नेतृत्व शैली आज भी प्रशासन और समाज के लिए सीख का स्रोत हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती हर वर्ष न केवल एक ऐतिहासिक स्मरण का अवसर होती है, बल्कि यह उनके आदर्शों को पुनः आत्मसात करने का भी समय है। विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि देना इस बात का संकेत है कि उनका व्यक्तित्व और योगदान दलगत सीमाओं से परे है।



