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Shashi Tharoor: शशि थरूर ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों को किया खारिज, कांग्रेस नेतृत्व से की मुलाकात

Shashi Tharoor: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने पिछले कुछ समय से चल रही राजनीतिक अटकलों पर पूर्णविराम लगा दिया है। थरूर और कांग्रेस आलाकमान के बीच कथित मनमुटाव की खबरें हाल के दिनों में सुर्खियों में थीं, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह साफ होती दिख रही है। दिल्ली में 29 जनवरी को थरूर ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से लंबी मुलाकात की। इस बैठक के बाद थरूर काफी आश्वस्त नजर आए और उन्होंने नेतृत्व के साथ अपनी बातचीत पर खुशी जाहिर की।

Shashi Tharoor: शशि थरूर ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों को किया खारिज, कांग्रेस नेतृत्व से की मुलाकात
Shashi Tharoor: शशि थरूर ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों को किया खारिज, कांग्रेस नेतृत्व से की मुलाकात

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर थरूर के रुख ने बढ़ाई थी दूरियां

दरअसल, विवाद की जड़ शशि थरूर के वे बयान और सोशल मीडिया पोस्ट थे, जिन्हें राजनीतिक गलियारों में भाजपा के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर के तौर पर देखा जा रहा था। विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान संबंधों और पहलगाम हमले के बाद कूटनीतिक वार्ताओं को लेकर उनकी टिप्पणियों ने कांग्रेस के भीतर हलचल पैदा कर दी थी। पार्टी के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से थरूर के इरादों पर सवाल उठाए थे, क्योंकि उनके विचार आधिकारिक कांग्रेस लाइन से थोड़े अलग नजर आ रहे थे। हालांकि, अब थरूर ने इन सभी आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी है।

भाजपा समर्थक कहे जाने पर थरूर की दोटूक सफाई

दिल्ली से केरल लौटने के बाद तिरुवनंतपुरम में मीडिया से मुखातिब होते हुए थरूर ने उन धारणाओं को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें उन्हें भाजपा समर्थक बताया जा रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया या विश्लेषक भले ही उनके बयानों को सत्तारूढ़ दल के प्रति झुकाव के रूप में देखें, लेकिन उनके लिए वह स्टैंड हमेशा ‘भारत समर्थक’ या ‘सरकार समर्थक’ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब बात देश की अंतरराष्ट्रीय छवि और कूटनीति की आती है, तो वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में बोलना पसंद करते हैं।

पार्टी लाइन और व्यक्तिगत राय के बीच का संतुलन

अपनी कार्यशैली पर बात करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का पक्ष रखना उनकी पुरानी आदत है और इसमें कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि एक अनुशासित पार्टी कार्यकर्ता होने के नाते उन्हें आधिकारिक पार्टी लाइन का सम्मान करना चाहिए। थरूर ने भरोसा दिलाया कि संसद के भीतर उन्होंने हमेशा कांग्रेस के स्टैंड का समर्थन किया है और आगे भी वह पार्टी की नीतियों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर असंतुष्ट गुटों को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस छोड़ने के सवाल पर दिया सीधा जवाब

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे सीधे तौर पर पूछा कि क्या वे भविष्य में कांग्रेस छोड़कर किसी अन्य दल का दामन थाम सकते हैं, तो थरूर ने बड़े ही स्पष्ट लहजे में कहा, “मैं कांग्रेस में ही रहूंगा और कहीं नहीं जा रहा हूं।” उन्होंने आगामी चुनावों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे केरल में चुनावी अभियान का सक्रिय हिस्सा बनेंगे और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे। उनके इस बयान ने उन तमाम चर्चाओं को शांत कर दिया है जो उनके पाला बदलने को लेकर की जा रही थीं।

आगामी चुनाव और थरूर की नई भूमिका

थरूर और आलाकमान के बीच सुलह के बाद अब यह माना जा रहा है कि कांग्रेस उन्हें आगामी चुनावों में बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। थरूर की अंतरराष्ट्रीय छवि और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता का लाभ उठाने के लिए पार्टी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव प्रचार में उतारने की योजना बना रही है। राहुल गांधी और खरगे के साथ हुई उनकी बैठक को भविष्य की रणनीति तय करने के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुल मिलाकर, थरूर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके विचार देशहित के लिए हो सकते हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक निष्ठा पूरी तरह कांग्रेस के प्रति है।

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