Shashi Tharoor on Bengaluru Demolition: बंगलूरू की सफाई पर कांग्रेस के भीतर ही छिड़ गई है रार, थरूर ने दिया बड़ा बयान
Shashi Tharoor on Bengaluru Demolition: कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में हाल ही में हुए तोड़फोड़ अभियान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने अब इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए राज्य सरकार के कदम का पुरजोर समर्थन किया है। थरूर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा की गई यह (administrative action) पूरी तरह से वैध और कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन थी। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को एक नई दिशा दे दी है, क्योंकि इस मुद्दे पर कांग्रेस की काफी किरकिरी हो रही थी।

अवैध कब्जे और स्वास्थ्य जोखिमों का हवाला
थरूर ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए इस कार्रवाई के पीछे के ठोस कारणों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर मकान बने थे, वह वास्तव में सरकारी जमीन थी और वहां का निवास पूरी तरह (illegal encroachment) की श्रेणी में आता था। इसके अलावा, उन्होंने एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह क्षेत्र पहले कचरा डंपिंग साइट था, जिसके जहरीले अवशेषों ने वहां के भूजल को बुरी तरह दूषित कर दिया था। ऐसे असुरक्षित वातावरण में लोगों का रहना जानलेवा साबित हो सकता था।
राजनीतिकरण के खिलाफ थरूर की दोटूक
विवाद को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर (Shashi Tharoor on Bengaluru Demolition) ने उन आलोचकों को आड़े हाथों लिया जो इस मानवीय मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल इस आधार पर मुद्दे को तूल देना गलत है कि प्रभावित लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं। थरूर के अनुसार, (government notification) के माध्यम से लोगों को पर्याप्त समय और सूचना दी गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब नियम सभी के लिए समान हैं, तो सरकारी जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया को ‘बुलडोजर राज’ का नाम देना बेमानी है।
विस्थापित परिवारों के लिए पुनर्वास की योजना
कांग्रेस नेता ने सरकार के मानवीय चेहरे का बचाव करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को लावारिस नहीं छोड़ा गया है। सरकार ने इन परिवारों के लिए पहले ही (temporary housing) की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है। थरूर ने जनता को भरोसा दिलाया कि प्रशासन ने अगले पांच से छह महीनों के भीतर सभी विस्थापितों को स्थायी मकान देने का लिखित वादा किया है। उन्होंने अपील की कि जब समाधान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो इस मामले को बेवजह भड़काने की कोई आवश्यकता नहीं है।
कानूनी गरिमा और प्रक्रियागत सुधार
हालांकि थरूर ने यह स्वीकार किया कि लोगों को स्थानांतरित करने की जमीनी प्रक्रिया में कुछ मामूली खामियां हो सकती हैं, लेकिन उन्होंने लक्ष्य की शुचिता पर कोई संदेह नहीं जताया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हर (legal framework) के भीतर ही कार्रवाई की जानी चाहिए और कर्नाटक सरकार ने ठीक वैसा ही किया है। थरूर के मुताबिक, किसी भी सुधार कार्य में थोड़े बहुत मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन अंतिम उद्देश्य नागरिक सुरक्षा और कानून का शासन ही होना चाहिए।
न्यायिक आदेशों के अनुपालन का दावा
पार्टी के भीतर और बाहर उठ रहे विरोध के सुरों के बीच थरूर ने इसे अदालती निर्देशों का पालन करार दिया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने (judicial compliance) सुनिश्चित करने के लिए कई बार नोटिस जारी किए थे। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकारोक्ति भी की कि वह स्वयं अभी तक जमीनी स्थिति का जायजा लेने कर्नाटक नहीं गए हैं, लेकिन प्राप्त सूचनाओं के आधार पर सरकार का पक्ष पूरी तरह से न्यायसंगत और तर्कसंगत नजर आता है।
विपक्ष और सहयोगियों की तीखी प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई ने न केवल भाजपा को हमलावर होने का मौका दिया, बल्कि कांग्रेस के सहयोगियों को भी नाराज कर दिया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने इसे ‘बुलडोजर राज’ की संज्ञा दी थी, जिसे थरूर ने सिरे से खारिज कर दिया। कर्नाटक में (inter party conflict) तब और बढ़ गया जब येलहंका के कोगिला लेआउट से कई परिवारों को अचानक हटा दिया गया। इस घटना ने एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है, जिसमें अब थरूर की एंट्री ने नया मोड़ ला दिया है।
निष्कर्ष: विकास और अधिकार के बीच का संतुलन
बंगलूरू की यह घटना दिखाती है कि शहरी विकास और गरीबों के पुनर्वास के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है। शशि थरूर का (political defense) यह संकेत देता है कि कर्नाटक सरकार अपनी कार्रवाई पर अडिग है और इसे स्वच्छता तथा सुरक्षा के बड़े दृष्टिकोण से देख रही है। अब देखना यह होगा कि क्या थरूर का यह रुख पार्टी के भीतर उठ रही विरोध की आवाजों को शांत कर पाता है या आने वाले दिनों में यह दरार और चौड़ी होगी।



