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RajyaSabhaElection – कई नेताओं का निर्विरोध चयन, तीन राज्यों में मतदान बाकी

RajyaSabhaElection – देश के विभिन्न राज्यों में राज्यसभा की रिक्त सीटों को भरने की प्रक्रिया के बीच कई नेताओं का उच्च सदन के लिए निर्विरोध चयन हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत कुल 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले के राज्यसभा के लिए चुन लिए गए हैं। नामांकन वापसी की समयसीमा समाप्त होने के बाद अब कुछ राज्यों में सीमित सीटों पर चुनाव की स्थिति बनी है। बिहार, ओडिशा और हरियाणा में कुल 11 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा।

कुल सीटों और उम्मीदवारों की स्थिति

इस बार राज्यसभा के लिए दस राज्यों में कुल 37 सीटें खाली हुई थीं। इन सीटों के लिए शुरू में 40 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब कई सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं, जबकि कुछ राज्यों में मुकाबला तय हो गया है।

अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट को लेकर चुनावी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। इन तीनों राज्यों में कुल 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार इन सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा।

भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक

राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने संबंधित राज्यों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। पार्टी की ओर से जारी अधिसूचना में बिहार, हरियाणा और ओडिशा के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बिहार में केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को पर्यवेक्षक बनाया गया है। हरियाणा में यह जिम्मेदारी गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को दी गई है। वहीं ओडिशा में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है।

बिहार में संभावित मुकाबला और राजनीतिक समीकरण

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होना है, जहां एक सीट पर दिलचस्प मुकाबले की संभावना जताई जा रही है। राष्ट्रीय जनता दल ने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार उम्मीदवार हैं। शिवेश कुमार के लिए यह राज्यसभा में पहला अवसर हो सकता है।

इस चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का फैसला भी है। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा जाने का निर्णय घोषित किया था, जिसके साथ ही उनके लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के बाद राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने की चर्चा है।

ओडिशा में एक सीट पर मुकाबले की स्थिति

ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव होना है, जिनमें से एक सीट पर प्रतिस्पर्धा तय मानी जा रही है। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार उम्मीदवार बनाए गए हैं।

बीजद ने संतरूप मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दातेश्वर होता को मैदान में उतारा है। इसके अलावा भाजपा के समर्थन से दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। इस स्थिति के कारण यहां क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हरियाणा में भी चुनावी प्रतिस्पर्धा

हरियाणा में दो सीटों के लिए चुनाव होना है, जहां एक सीट को लेकर मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस के पास विधानसभा में 37 विधायक हैं और पार्टी को एक सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या से अधिक समर्थन प्राप्त है।

इस सीट के लिए भाजपा की ओर से संजय भाटिया उम्मीदवार हैं, जबकि कांग्रेस ने करमवीर सिंह बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल भी चुनावी मैदान में हैं। नांदल पहले 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।

कई राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

इस चुनाव प्रक्रिया में कई राज्यों में उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन भी हुआ है। महाराष्ट्र की सात सीटों पर सभी उम्मीदवार बिना मुकाबले के चुने गए हैं। इनमें शरद पवार, रामदास आठवले, विनोद तावड़े, रामराव वडकुटे, माया इवनाते, ज्योति वाघमारे और पार्थ पवार शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल में पांच सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जिनमें बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार, मेनका गुरुस्वामी, कोयल मल्लिक और भाजपा के राहुल सिन्हा शामिल हैं। इसके अलावा असम, तेलंगाना, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश में भी कई उम्मीदवार बिना मुकाबले के उच्च सदन के लिए चुने गए हैं।

इन चुनावों के बाद राज्यसभा में विभिन्न दलों की ताकत में आंशिक बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है और राजनीतिक दलों की नजर आगामी मतदान वाले राज्यों पर टिकी हुई है।

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