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Raj Thackeray: शिवसेना से अलगाव के बाद बाल ठाकरे से दूरी का दर्द बोले राज ठाकरे

Raj Thackeray: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने अपने राजनीतिक जीवन से जुड़ी एक बेहद भावनात्मक बात साझा करते हुए कहा है कि शिवसेना छोड़ने का फैसला जितना कठिन नहीं था, उससे कहीं ज्यादा तकलीफदेह अपने चाचा और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे से नियमित रूप से न मिल पाना था। उन्होंने माना कि यह दूरी उनके लिए व्यक्तिगत रूप से गहरा आघात थी, जिसे वह लंबे समय तक भीतर ही भीतर महसूस करते रहे।

Raj Thackeray
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सामना में लिखे लेख से सामने आई भावनाएं

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के मुखपत्र सामना में बाल ठाकरे की जन्मशती के अवसर पर प्रकाशित लेख में राज ठाकरे ने अपने चाचा के साथ रिश्तों को विस्तार से याद किया। उन्होंने लिखा कि वर्ष 2005 में जब उन्होंने शिवसेना (अविभाजित) से अलग होने का फैसला लिया, तब राजनीतिक मतभेदों से ज्यादा उन्हें मातोश्री से दूर हो जाने का दुख सता रहा था। राज के अनुसार, यह निर्णय उनके जीवन के सबसे भावनात्मक क्षणों में से एक था।

मातोश्री से दूरी बनी सबसे बड़ा दर्द

राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि पार्टी छोड़ना एक राजनीतिक कदम था, लेकिन मातोश्री से दूरी एक निजी क्षति थी। उन्होंने लिखा कि वह पहले ही अपने पिता को खो चुके थे और अब अपने चाचा से दूरी का विचार उन्हें अंदर से तोड़ रहा था। उन्हें यह डर सताता था कि अब वह पहले की तरह अपने परिवार और करीबी लोगों से नहीं मिल पाएंगे।

छात्र नेता के दौर की एक खास याद

राज ठाकरे ने अपने छात्र जीवन की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब वह शिवसेना की छात्र शाखा के प्रमुख थे और काला घोड़ा इलाके में एक रैली आयोजित की गई थी, तब बाल ठाकरे ने एक सार्वजनिक Landline Phone के जरिए उनका भाषण सुना था। यह घटना उनके लिए प्रेरणादायक थी और उन्हें हमेशा यह एहसास कराती रही कि बाल ठाकरे हर कदम पर उन्हें देख रहे हैं।

बचपन की यादें और चाचा का स्नेह

लेख में राज ठाकरे ने अपने बचपन की एक मार्मिक स्मृति भी साझा की। उन्होंने बताया कि जब उन्हें जलने से गंभीर चोट लगी थी, तब बाल ठाकरे ने करीब दो महीने तक स्वयं Antiseptic लगाकर उनके घावों की देखभाल की थी। राज के अनुसार, यह केवल एक चाचा नहीं बल्कि एक अभिभावक का स्नेह था, जिसने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया।

राजनीतिक अलगाव और मनसे की स्थापना

राज ठाकरे ने 2005 में अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिवसेना (अविभाजित) छोड़ दी थी। इसके एक वर्ष बाद उन्होंने Maharashtra Navnirman Sena की स्थापना की। उन्होंने लिखा कि इस फैसले के बावजूद बाल ठाकरे का उनके जीवन पर प्रभाव कभी कम नहीं हुआ। वह हमेशा उनके पीछे एक Rock Like Support की तरह खड़े रहे।

मुश्किल समय में भी मिला चाचा का साथ

राज ठाकरे ने एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि एक बार जब उनकी गाड़ी को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, तब बाल ठाकरे ने स्वयं फोन कर उनकी कुशलक्षेम पूछी थी। यह उनके लिए इस बात का प्रमाण था कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद पारिवारिक रिश्ता और स्नेह कायम रहा।

बाल ठाकरे की आदतों और सोच की झलक

अपने चाचा की आदतों को याद करते हुए राज ठाकरे ने लिखा कि पाकिस्तान का कड़ा विरोध करने के बावजूद बाल ठाकरे मेहदी हसन और गुलाम अली की गजलें सुनना पसंद करते थे। उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म निर्देशक राज कपूर ने फिल्म मेरा नाम जोकर के संपादन को लेकर बाल ठाकरे से सलाह ली थी, क्योंकि उस दौर में फिल्म को Communist Ideology से जुड़ा माना जा रहा था।

फिल्मी हस्तियों की मदद के किस्से

राज ठाकरे के अनुसार, बाल ठाकरे ने अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ बच्चन की छवि को लेकर उठे विवाद को सुलझाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। बोफोर्स विवाद के समय बाल ठाकरे की सलाह पर अमिताभ बच्चन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह को पत्र लिखा, जिससे उनके खिलाफ चल रही Negative Publicity काफी हद तक कम हो गई।

यह लेख न केवल राज ठाकरे की व्यक्तिगत पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद बाल ठाकरे और राज ठाकरे के बीच भावनात्मक रिश्ता कितना गहरा था।

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