RailSafety – रेलवे ट्रैक रखरखाव के लिए नई तकनीक, पायलट प्रोजेक्ट शुरू
RailSafety – रेलवे पटरियों की देखरेख और मरम्मत को अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार एक नई प्रणाली लागू करने की तैयारी में है। इस पहल के तहत रेल कम रोड व्हीकल नामक विशेष वाहन लाए जा रहे हैं, जिनकी मदद से ट्रैक मेंटेनेंस से जुड़े कर्मचारी अपने उपकरण और जरूरी सामग्री सीधे कार्यस्थल तक आसानी से पहुंचा सकेंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि इस प्रणाली का परीक्षण गुजरात के भावनगर डिवीजन में शुरू हो चुका है और शुरुआती सफलता के बाद वहां दो ऐसे वाहन तैनात भी कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इससे ट्रैक रखरखाव की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तेज होगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा भी मजबूत होगी।

नई प्रणाली से रखरखाव प्रक्रिया होगी आसान
रेल मंत्री के अनुसार, अब तक कर्मचारियों को पटरियों तक पहुंचने और उपकरण ले जाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नई प्रणाली के तहत रेल कम रोड व्हीकल सीधे ट्रैक तक पहुंच सकेगा, जिससे समय की बचत होगी और काम की दक्षता बढ़ेगी। इससे न केवल मरम्मत कार्य तेजी से होगा बल्कि ट्रैक की निगरानी भी अधिक नियमित रूप से हो सकेगी।
यह बदलाव रेलवे के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे उन क्षेत्रों में भी काम करना आसान होगा, जहां पहुंच पहले चुनौतीपूर्ण होती थी।
ड्रोन और आधुनिक तकनीक का बढ़ता उपयोग
रेल मंत्री ने यह भी बताया कि रेलवे अब ट्रैक निरीक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ा रहा है। ड्रोन और उन्नत माप उपकरणों की मदद से पटरियों की स्थिति का सटीक आकलन किया जा रहा है। इससे पहले जहां कई बार अनुमान के आधार पर निर्णय लिए जाते थे, वहीं अब सटीक आंकड़ों के आधार पर मरम्मत और सुधार कार्य किए जा सकेंगे।
इन तकनीकों के उपयोग से ट्रैक की स्थिति, मोड़ और क्रॉसिंग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां अधिक स्पष्ट रूप से मिलेंगी, जिससे संभावित जोखिमों की पहचान समय रहते की जा सकेगी।
रेल हादसों में कमी और भविष्य का लक्ष्य
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले एक दशक में रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उनके अनुसार, इस अवधि में रेल दुर्घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। सरकार अब इसे और कम करते हुए न्यूनतम स्तर तक लाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में करीब 36,000 किलोमीटर नई रेल पटरियां बिछाई गई हैं। यह विस्तार रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने और यातायात को सुगम बनाने में सहायक रहा है।
ट्रैक मशीनों की संख्या बढ़ाने की योजना
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री ने बताया कि वर्तमान में ट्रैक रखरखाव के लिए करीब 1,800 मशीनें काम कर रही हैं। सरकार इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग 3,000 करने की योजना बना रही है। इससे ट्रैक निरीक्षण और मरम्मत से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी और पुरानी समस्याओं का समाधान भी आसान होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मशीनों की संख्या बढ़ने से मानव श्रम पर निर्भरता कुछ हद तक कम होगी और कार्य की गुणवत्ता में सुधार होगा।
कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
रेल मंत्री ने ट्रैक मेंटेनेंस कर्मचारियों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों को आधुनिक उपकरण, बेहतर कार्य परिस्थितियां और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके साथ ही एक नया मोबाइल आधारित सिस्टम भी विकसित किया गया है, जिसका फिलहाल परीक्षण चल रहा है। इस प्रणाली का उद्देश्य कर्मचारियों की सुरक्षा को और मजबूत करना है, ताकि काम के दौरान किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।