Politics – कर्नाटक में आरएसएस पर आरोपों से गरमाई सियासत
Politics – कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। राज्य के मंत्री प्रियांक खड़गे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर तीखी जुबानी जंग छिड़ी हुई है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रियांक खड़गे ने आरएसएस पर गंभीर आर्थिक आरोप लगाए। इसके बादभाजपा नेताओं ने भी कड़ा जवाब देते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया, जिससे मामला और तूल पकड़ता दिख रहा है।

आरएसएस पर लगाए गए आरोप
प्रियांक खड़गे ने आरोप लगाया कि आरएसएस 2,500 से अधिक संगठनों के नेटवर्क के जरिए आर्थिक लेन-देन करता है। उनका दावा था कि इन संगठनों से धन संग्रह किया जाता है और इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि संगठन का औपचारिक पंजीकरण क्यों नहीं है और क्या वह कानून या संविधान से ऊपर है। खड़गे के इन बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई और विपक्षी दलों ने इसे गंभीर आरोप बताते हुए स्पष्ट जवाब की मांग की।
भाजपा का तीखा पलटवार
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रियांक खड़गे को पहले अपनी पार्टी के अस्तित्व और पंजीकरण की चिंता करनी चाहिए, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष उनके पिता हैं। विजयेंद्र ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस राजनीतिक नक्शे पर अपना प्रभाव खोती जा रही है और ऐसे में दूसरों पर उंगली उठाने से पहले आत्ममंथन जरूरी है। भाजपा नेताओं ने खड़गे के आरोपों को निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक रणनीति करार दिया।
क्षेत्रीय विकास को लेकर भी उठा सवाल
विवाद केवल आरएसएस तक सीमित नहीं रहा। विजयेंद्र ने कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के विकास को लेकर भी खड़गे परिवार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद इस क्षेत्र को अपेक्षित विकास नहीं मिल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि खड़गे परिवार ने क्षेत्र की स्थिति सुधारने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए, जिसके कारण यह इलाका अभी भी पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है। इस बयान के बाद विकास बनाम राजनीति की बहस भी तेज हो गई।
विधानसभा में विपक्ष की प्रतिक्रिया
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आरएसएस पर आरोप लगाना “आसमान पर थूकने” जैसा है। उनके अनुसार, संगठन देशभर में सामाजिक कार्यों से जुड़ा रहा है और उसे बदनाम करने की कोशिश राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही है। अशोक ने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह तथ्यों के आधार पर चर्चा करे और बिना प्रमाण के आरोप लगाने से बचे।
खड़गे का जवाब और केंद्र सरकार पर सवाल
इन आरोपों के बीच प्रियांक खड़गे ने भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कल्याण कर्नाटक ऐतिहासिक और भौगोलिक कारणों से पिछड़ा क्षेत्र रहा है। उनका तर्क था कि यदि क्षेत्रीय असंतुलन को गंभीरता से समझा जाता, तो केंद्र सरकार अनुच्छेद 371जे के तहत विशेष दर्जे से संबंधित प्रावधानों को लेकर सकारात्मक रुख अपनाती। खड़गे ने भाजपा नेतृत्व से सवाल किया कि जब बी.एस. येदियुरप्पा चार बार मुख्यमंत्री रहे, तो शिवमोगा को अपेक्षित स्तर पर विकसित क्यों नहीं किया गया।
बढ़ती बयानबाज़ी और सियासी असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावी समीकरणों पर भी असर डाल सकता है। दोनों दल अपने-अपने समर्थकों को साधने की कोशिश में आक्रामक रुख अपना रहे हैं। जहां कांग्रेस पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा उठा रही है, वहीं भाजपा इसे संगठन पर हमला और राजनीतिक रणनीति बता रही है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि कर्नाटक की राजनीति में बयानबाज़ी का दौर जल्द थमता नजर नहीं आ रहा।



