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PahalgamAttack – एक साल बाद भी नहीं भर पाए आतंकी हमले का शिकार होने वालों के जख्म, परिवार अब भी सदमे में…

PahalgamAttack – पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक वर्ष पूरा होने जा रहा है, लेकिन इस घटना में अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए समय जैसे थम सा गया है। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इन्हीं में से एक थे 65 वर्षीय एन रामचंद्रन, जो अपने परिवार के साथ कश्मीर घूमने गए थे। इस घटना ने न सिर्फ उनके परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया था।

परिवार के लिए अब भी मुश्किल है इस दर्द से उबरना

रामचंद्रन की बेटी आरती आर मेनन आज भी इस हादसे को याद कर भावुक हो जाती हैं। उनका कहना है कि एक साल बीतने के बाद भी हालात बदले नहीं हैं और इस विषय पर कुछ कह पाना उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अभी इस घटना पर खुलकर बात करने की स्थिति में नहीं हैं। यह बयान उस गहरे मानसिक आघात को दर्शाता है, जिससे उनका परिवार अब भी गुजर रहा है।

हमले की घटना ने देश को झकझोरा था

यह हमला पहलगाम की बैसरन घाटी में हुआ था, जहां आतंकियों ने अचानक पर्यटकों पर गोलीबारी कर दी थी। इस घटना में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। हमले के बाद देशभर में आक्रोश देखने को मिला और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे। इस त्रासदी ने पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के महत्व को फिर से उजागर किया।

हमले के बाद की गई थी सैन्य कार्रवाई

इस घटना के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इस अभियान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया था। सरकार की ओर से इसे आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम के रूप में देखा गया। इस कार्रवाई के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की तैयारी

हमले की बरसी पर कई स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से सुबह के समय एक कार्यक्रम रखा गया है, जबकि एक अन्य स्मरण सभा रविवार को आयोजित की जाएगी। इन आयोजनों के माध्यम से मृतकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जाएगी।

जीवन को फिर से संभालने की कोशिश

आरती मेनन, जो दुबई में कार्यरत हैं, पिछले एक वर्ष से कोच्चि में अपने परिवार के साथ थीं। अब उन्होंने वापस दुबई लौटने का निर्णय लिया है। यह फैसला उनके लिए आसान नहीं रहा होगा, लेकिन धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखाया है कि ऐसी त्रासदियां केवल एक घटना नहीं होतीं, बल्कि लंबे समय तक लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं।

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