OdishaDay – उत्कल दिवस पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं
OdishaDay – उत्कल दिवस के अवसर पर बुधवार को पूरे ओडिशा में उत्साह और गौरव का माहौल देखने को मिला। इस खास दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। यह दिन राज्य की ऐतिहासिक पहचान और भाषाई आधार पर उसके गठन की याद दिलाता है।

प्रधानमंत्री ने ओडिशा की संस्कृति को बताया विशेष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपने संदेश में ओडिशा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह राज्य अपनी परंपराओं और मूल्यों के कारण देश में एक अलग स्थान रखता है। ओडिया संगीत, साहित्य और कला ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री ने ओडिशा के लोगों के स्वभाव की भी सराहना की और उन्हें दृढ़ संकल्प, सादगी और आत्मीयता का प्रतीक बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में राज्य विकास के नए आयाम स्थापित करेगा और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।
मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक योगदान को किया नमन
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने भी उत्कल दिवस के मौके पर प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए राज्य के इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा देश का पहला ऐसा राज्य था, जिसका गठन भाषाई आधार पर हुआ था। यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का विषय है और इसकी अलग पहचान को दर्शाती है।
उन्होंने उन महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी, जिनके प्रयासों और बलिदान से ओडिशा को एक अलग प्रांत का दर्जा मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार राज्य की भाषा, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विकास और एकता का दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में राज्य के विकास को लेकर भी स्पष्ट दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर नागरिक की आकांक्षाओं को पूरा करना है और ओडिशा को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस अवसर पर एकजुट होकर राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए संकल्प लें।
उत्कल दिवस का ऐतिहासिक महत्व
हर वर्ष 1 अप्रैल को मनाया जाने वाला उत्कल दिवस ओडिशा के गठन की ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है। वर्ष 1936 में इसी दिन ओडिशा को एक अलग प्रांत के रूप में स्थापित किया गया था। यह फैसला भाषाई पहचान के आधार पर लिया गया था, जिसने राज्य को अपनी विशिष्ट पहचान दिलाई।
यह दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन संघर्षों और प्रयासों को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने ओडिशा को उसकी वर्तमान पहचान दी। इस मौके पर राज्यभर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आयोजनों के जरिए इसकी समृद्ध विरासत को सम्मान दिया जाता है।



