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NationBuilding – देश की प्रगति से ही व्यक्ति की समृद्धि संभव: भागवत

NationBuilding – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब देश मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध हो। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सफलता को राष्ट्र की प्रगति से अलग करके नहीं देखा जा सकता। केरल के कोच्चि में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह विचार साझा किए, जहां बड़ी संख्या में युवा और स्वयंसेवक मौजूद थे।

राष्ट्र और व्यक्ति का परस्पर संबंध

अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि राष्ट्र और व्यक्ति के बीच गहरा संबंध होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि जब देश आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होता है, तब ही नागरिकों के जीवन में स्थिरता और समृद्धि आती है। उन्होंने समझाया कि यदि लोग केवल व्यक्तिगत लाभ पर ध्यान देंगे और राष्ट्रहित को पीछे छोड़ देंगे, तो दीर्घकाल में इसका असर समाज और व्यक्ति दोनों पर पड़ेगा। इसलिए जरूरी है कि हर नागरिक अपने कार्यों में देशहित को प्राथमिकता दे।

युवाओं के सामने चुनौती और विकल्प

कार्यक्रम में मौजूद युवाओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आज के समय में कई युवा इस दुविधा में रहते हैं कि वे अपने करियर पर ध्यान दें या देश के लिए कुछ करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई दो अलग-अलग रास्ते नहीं हैं, बल्कि सही दिशा में प्रयास करने से दोनों लक्ष्यों को साथ हासिल किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने पेशेवर जीवन में उत्कृष्टता हासिल करते हुए समाज और देश के विकास में भी योगदान दें।

समृद्धि और सुरक्षा का साझा आधार

भागवत ने इस बात को रेखांकित किया कि समृद्धि और सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। उनके अनुसार, यदि देश सुरक्षित नहीं होगा, तो आर्थिक प्रगति भी प्रभावित होगी और इसका सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब नागरिक राष्ट्र की सुरक्षा और विकास में अपनी भूमिका निभाते हैं, तो इसका सकारात्मक परिणाम उनके व्यक्तिगत जीवन में भी दिखाई देता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में सहभागिता

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन बालागोकुलम द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का हिस्सा था। उद्घाटन सत्र में भागवत ने भगवान कृष्ण को पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने बच्चों और प्रतिभागियों से बातचीत भी की और उनके अनुभवों के बारे में जाना। इस दौरान उन्होंने सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर

अपने पूरे संबोधन में भागवत ने बार-बार इस बात को दोहराया कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर ईमानदारी से काम करे और देश के विकास में योगदान दे, तो सामूहिक रूप से बड़ा परिवर्तन संभव है। उनके इस संदेश को कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने गंभीरता से सुना और सराहा।

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