National Voters Day: राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर पीएम मोदी ने युवाओं को दी बड़ी जिम्मेदारी
National Voters Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उत्साहपूर्वक भाग लेने का पुरजोर आग्रह किया है। रविवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता होना केवल एक संवैधानिक विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कर्तव्य भी है। यह जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक को भारत के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने के लिए अपना मत रखने का मौलिक अधिकार प्रदान करती है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के पावन अवसर पर ‘माय-भारत’ के स्वयंसेवकों को लिखे एक विशेष पत्र में उन्होंने मतदाताओं को देश की (Economic Development Journey) का असली भाग्य विधाता करार दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, मतदान न केवल एक अधिकार है बल्कि यह नए भारत के निर्माण में नागरिकों की सीधी भागीदारी का सबसे बड़ा प्रतीक है।

लोकतंत्र की पहचान और उंगली पर लगी अमिट स्याही
पीएम मोदी ने अपने संदेश में मतदान (National Voters Day) के प्रतीकात्मक महत्व पर गहराई से प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि मतदान के समय उंगली पर लगने वाली अमिट स्याही इस बात का प्रमाण है कि हमारा लोकतंत्र पूरी तरह जीवंत है और इसका उद्देश्य अत्यंत व्यापक है। भारत में प्रतिवर्ष 25 जनवरी को निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में यह दिवस मनाया जाता है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि (Democratic Governance Values) को अक्षुण्ण रखने के लिए हर एक वोट की कीमत अनमोल है। उन्होंने समाज के वरिष्ठ वर्ग से भी अपील की कि वे अपने आसपास के उन युवाओं का मार्गदर्शन करें जो इस वर्ष पहली बार मतदाता सूची में शामिल होने जा रहे हैं।
पहली बार के मतदाताओं का उत्साह और स्वागत
प्रधानमंत्री का मानना है कि जो युवा पहली बार मतदान करने जा रहे हैं, उनके जीवन में यह एक मील का पत्थर साबित होने वाला क्षण है। उन्होंने कहा कि इन नए मतदाताओं का लोकतंत्र के महापर्व में दिल खोलकर स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके पास राष्ट्र के भाग्य को पूरी तरह बदलने की अद्भुत क्षमता है। मोदी ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि युवाओं की (Youth Civic Engagement) ही वह शक्ति है जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उनके अनुसार, यह नई पीढ़ी न केवल जागरूक है बल्कि वह देश की समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक और नवाचार का भी बेहतर उपयोग करना जानती है।
माय-भारत स्वयंसेवकों की भूमिका और जागरूकता अभियान
‘माय-भारत’ पोर्टल के स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पीढ़ी किसी भी कार्य को कल पर टालने में विश्वास नहीं रखती। यह ‘कैन डू’ यानी ‘कर दिखाने’ की भावना से ओतप्रोत है, जो कठिन से कठिन लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर प्राप्त करने का साहस रखती है। उन्होंने इन स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे (Voter Awareness Campaign) को जन-जन तक पहुंचाएं और लोगों को पंजीकरण के लिए प्रेरित करें। प्रधानमंत्री ने भारत निर्वाचन आयोग के उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की भी प्रशंसा की, जो दुर्गम क्षेत्रों में जाकर लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
भारत: लोकतंत्र की जननी और वैश्विक पहचान
वैश्विक पटल पर भारत की छवि को रखते हुए प्रधानमंत्री ने गर्व से कहा कि भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि यह लोकतंत्र की जननी भी है। हमारे देश में लोकतांत्रिक मूल्यों का इतिहास सदियों पुराना है और यह हमारी संस्कृति के रग-रग में बसा हुआ है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे पहली बार मतदाता बनने के अवसर को एक उत्सव की तरह मनाएं। (Constitutional Rights Awareness) को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूल और कॉलेजों को इसे एक विशेष समारोह के रूप में आयोजित करना चाहिए ताकि छात्रों को अपनी नई जिम्मेदारी का गौरवपूर्ण अहसास हो सके।
समावेशी मतदान और नारी शक्ति का योगदान
अंत में, प्रधानमंत्री ने उन मतदाताओं की प्रतिबद्धता का जिक्र किया जो भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। चाहे कोई हिमालय की चोटियों पर हो या थार के रेगिस्तान में, हर भारतीय यह सुनिश्चित करता है कि उसकी आवाज सुनी जाए। उन्होंने विशेष रूप से (Women Political Participation) को सराहा और कहा कि नारी शक्ति की सक्रियता ने भारत के लोकतंत्र की नींव को और अधिक ठोस बनाया है। समावेशी लोकतंत्र तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग, विशेषकर युवा महिलाएं, अपनी आवाज को वोट के माध्यम से बुलंद करें और विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने में अपना योगदान दें।



