MountEverest – शिखर से लौटते समय दो भारतीय पर्वतारोहियों की हुई मौत
MountEverest – नेपाल में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट से लौटते समय दो भारतीय पर्वतारोहियों की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, दोनों पर्वतारोही शिखर फतह करने के बाद नीचे उतर रहे थे, तभी अत्यधिक थकान और कठिन मौसम परिस्थितियों के कारण उनकी स्थिति बिगड़ गई। घटना ने एक बार फिर हिमालयी अभियानों के दौरान सामने आने वाले जोखिमों को चर्चा में ला दिया है।

उतराई के दौरान बिगड़ी तबीयत
नेपाल अभियान संचालक संघ के महासचिव ऋषि भंडारी ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि मृतकों की पहचान अरुण कुमार तिवारी और संदीप अरे के रूप में हुई है। दोनों पर्वतारोही सफलतापूर्वक एवरेस्ट शिखर तक पहुंच गए थे, लेकिन वापसी के दौरान उन्हें गंभीर शारीरिक थकान का सामना करना पड़ा। बताया गया कि ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और लगातार कठिन चढ़ाई के कारण उनकी हालत तेजी से खराब हुई।
गाइडों ने बचाने की कोशिश की
अभियान से जुड़े गाइडों ने दोनों पर्वतारोहियों को सुरक्षित नीचे लाने के लिए हर संभव प्रयास किया। हालांकि प्रतिकूल परिस्थितियों और अत्यधिक कमजोरी के चलते उन्हें बचाया नहीं जा सका। पर्वतारोहण विशेषज्ञों का कहना है कि एवरेस्ट पर चढ़ाई जितनी चुनौतीपूर्ण होती है, उससे कहीं अधिक जोखिम भरा सफर नीचे उतरने का माना जाता है, क्योंकि उस समय शरीर पूरी तरह थक चुका होता है।
एवरेस्ट अभियानों में बढ़ रही चुनौतियां
हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए नेपाल पहुंचते हैं। हालांकि ऊंचाई, खराब मौसम, कम ऑक्सीजन और अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने जैसी समस्याएं इस अभियान को बेहद कठिन बना देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पर्वतारोहियों को शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मौसम और ऊंचाई से जुड़ी परिस्थितियों के प्रति भी पूरी तरह तैयार रहना जरूरी है।
प्रशासन और अभियान एजेंसियां सतर्क
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और अभियान संचालक एजेंसियों ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। नेपाल सरकार पर्वतारोहण सीजन के दौरान लगातार निगरानी रखती है और पर्वतारोहियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी करती है। इसके बावजूद एवरेस्ट जैसे कठिन अभियानों में जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं किए जा सकते।
इस हादसे से पर्वतारोहण समुदाय में शोक का माहौल है। दोनों भारतीय पर्वतारोहियों की मौत ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह करना जितना गौरवपूर्ण है, उतना ही खतरनाक भी।