MoneyLaunderingCase – पूर्व कॉर्पोरेट अधिकारी को मिली 14 दिन की न्यायिक हिरासत
MoneyLaunderingCase – दिल्ली की द्वारका स्थित एक अदालत ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पूर्व समूह प्रबंध निदेशक सतीश सेठ को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कार्रवाई के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 2 जुलाई तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। मामला कथित धन शोधन से जुड़ा है, जिसकी जांच केंद्रीय एजेंसी कर रही है।

ईडी की कार्रवाई के बाद अदालत में पेशी
अधिकारियों के अनुसार, सतीश सेठ को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच के तहत गिरफ्तार किया था। गुरुवार को उन्हें अवकाशकालीन न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के दौरान एजेंसी ने जांच से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखा, जिसके बाद न्यायालय ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश पारित किया।
विदेशों में धन भेजने के आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित रूप से फर्जी बिलों के माध्यम से हीरे के आयात से जुड़े लेन-देन का इस्तेमाल कर धन को विदेशों तक पहुंचाया गया। ईडी का दावा है कि इस प्रक्रिया में हवाला नेटवर्क का उपयोग किए जाने की आशंका है। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि वित्तीय लेन-देन किस प्रकार संचालित किए गए और इसमें किन-किन पक्षों की भूमिका रही।
सड़क परियोजनाओं से जुड़ा है मामला
मामले की जांच दो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय लेन-देन के संदर्भ में की जा रही है। इनमें राजस्थान की जयपुर-रिंगस टोल सड़क परियोजना और तमिलनाडु की त्रिची-करूर टोल सड़क परियोजना शामिल बताई गई हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन परियोजनाओं से जुड़े सार्वजनिक धन के उपयोग और वित्तीय प्रवाह में अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
आरोप पत्र में दर्ज हैं वित्तीय दावे
अदालत में दाखिल आरोप पत्र के अनुसार, जांच एजेंसी ने दावा किया है कि लगभग 92 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए थे। ईडी का कहना है कि इस धन के स्रोत और उसके उपयोग की विस्तृत जांच की जा रही है। हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
हिरासत के दौरान मिली कुछ सुविधाएं
सुनवाई के दौरान अदालत ने सतीश सेठ को चिकित्सकीय जरूरतों के मद्देनजर कुछ राहत भी प्रदान की। न्यायालय ने उन्हें चश्मा रखने और चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाएं लेने की अनुमति दी है। साथ ही जेल प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि नियमों के अनुरूप आवश्यक सुविधाओं पर निर्णय लिया जाए।
जांच पर बनी हुई है नजर
यह मामला वित्तीय अनियमितताओं और कथित धन शोधन से जुड़े गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। प्रवर्तन निदेशालय जांच के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रहा है और संबंधित दस्तावेजों तथा लेन-देन की जांच जारी है। आने वाले दिनों में मामले की अगली सुनवाई और जांच की प्रगति पर सभी की नजर रहेगी।