Mausam Noor Joins Congress 2026: क्या मौसम नूर की घर वापसी ढहा देगी ममता का किला…
Mausam Noor Joins Congress 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब तृणमूल कांग्रेस की कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद मौसम नूर ने शनिवार को (Political Defection Bengal) सबको चौंकाते हुए टीएमसी का साथ छोड़ दिया। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले ममता बनर्जी के लिए इसे एक बड़ा रणनीतिक नुकसान माना जा रहा है। मालदा के प्रतिष्ठित खान चौधरी परिवार की विरासत को संभालने वाली मौसम नूर ने एक बार फिर अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस का दामन थाम लिया है, जिससे उत्तर बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय में ‘घर वापसी’ का जश्न
शनिवार की दोपहर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय (24 अकबर रोड) में एक गरिमामयी समारोह के दौरान 46 वर्षीय मौसम नूर ने पार्टी की आधिकारिक सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान (Congress Leadership Presence) कांग्रेस के वरिष्ठ रणनीतिकार जयराम रमेश, एआईसीसी महासचिव गुलाम अहमद मीर और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार विशेष रूप से उपस्थित रहे। पार्टी नेताओं ने इसे केवल एक सदस्यता नहीं, बल्कि बंगाल में कांग्रेस के पुनरुद्धार की दिशा में एक ‘ऐतिहासिक कदम’ करार दिया है।
मालदा की धरती पर बदलेगा सत्ता का समीकरण
मौसम नूर की कांग्रेस में वापसी के पीछे सबसे बड़ा कारण आगामी विधानसभा चुनाव माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो मौसम नूर (Malda Assembly Constituency) से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं, जहाँ उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। इससे पहले वह 2009 से 2019 तक लगातार दो बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। मालदा और उत्तर बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में उनके परिवार का गहरा प्रभाव है, जिसका सीधा फायदा अब कांग्रेस को मिलने की उम्मीद है।
राज्यसभा कार्यकाल और इस्तीफे की चर्चा
वर्तमान में मौसम नूर टीएमसी की ओर से राज्यसभा सांसद हैं, जिनका कार्यकाल इसी वर्ष अप्रैल में समाप्त होने वाला था। हालांकि, कांग्रेस में शामिल होने के तुरंत बाद (Rajya Sabha Membership Status) को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। खबरों के अनुसार, वह जल्द ही राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे सकती हैं ताकि वह पूरी तरह से बंगाल की चुनावी राजनीति में सक्रिय हो सकें। उनके इस कदम से टीएमसी के भीतर एक बड़ी रिक्ति पैदा हो गई है जिसे भरना ममता सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
खान चौधरी परिवार की एकजुटता और कांग्रेस का बढ़ता कद
मौसम नूर का वापस कांग्रेस में आना मालदा के मशहूर ‘कोतवाली परिवार’ के एकजुट होने का भी संकेत है। उनके साथ इशा खान चौधरी ने भी (Family Legacy Politics) को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस ‘घर वापसी’ से अल्पसंख्यक वोट बैंक में टीएमसी की सेंधमारी रुकेगी और कांग्रेस एक बार फिर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने में सफल होगी। यह घटनाक्रम आगामी चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबले को और भी दिलचस्प बना देगा।
उत्तर बंगाल में टीएमसी के लिए बढ़ी मुश्किलें
ममता बनर्जी की पार्टी के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि उत्तर बंगाल हमेशा से भाजपा और कांग्रेस का गढ़ रहा है। टीएमसी ने (Regional Political Dynamics) को अपने पक्ष में करने के लिए मौसम नूर को बड़ी जिम्मेदारी दी थी, लेकिन उनके जाने से पार्टी का संगठनात्मक ढांचा कमजोर पड़ सकता है। अब टीएमसी को मालदा और आसपास के जिलों के लिए नई रणनीति तैयार करनी होगी, क्योंकि मौसम नूर का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं बल्कि एक बड़े जनसमर्थन का खिसकना है।
2026 के महासंग्राम की पहली बड़ी बिसात
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बिछ रही बिसात में यह पहला बड़ा मोहरा है जिसने अपनी चाल बदल दी है। मौसम नूर ने (Election Strategy 2026) के तहत यह फैसला लिया है ताकि वह अपनी राजनीतिक जड़ों को सुरक्षित रख सकें। कांग्रेस अब इस मौके को भुनाकर राज्य में ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में खुद को मजबूती से पेश करने की तैयारी में है। देखना यह होगा कि ममता बनर्जी इस झटके से उबरने के लिए क्या जवाबी कदम उठाती हैं।
कार्यकर्ताओं में जोश और भविष्य की राह
मौसम नूर की वापसी से बंगाल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। राज्य भर में (Party Cadre Motivation) को बढ़ाते हुए शुभंकर सरकार ने कहा कि यह तो बस शुरुआत है और आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम कांग्रेस से जुड़ेंगे। मौसम नूर ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वह हमेशा से कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ी रही हैं और ‘दीदी’ के साथ उनका अनुभव केवल एक सफर था, लेकिन असली घर ‘हाथ’ का साथ ही ह



