Maoist Surrender in Odisha 2025: बंदूक छोड़ चुनी अमन की राह, ओडिशा में करीब है माओवाद का अंत…
Maoist Surrender in Odisha 2025: ओडिशा के मलकानगिरी जिले में मंगलवार का सूरज एक नई उम्मीद लेकर आया, जब 22 माओवादियों ने एक साथ हथियार डालने का फैसला किया। यह (Odisha Police Anti-Naxal Operation) के इतिहास में इस साल की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि सरेंडर करने वाले इन सभी सदस्यों पर प्रशासन ने लाखों रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। लंबे समय तक हिंसा का रास्ता अपनाने वाले इन लोगों का मुख्यधारा में लौटना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

बड़े इनामी कमांडरों ने छोड़ा हिंसा का साथ
आत्मसमर्पण करने वाले इस समूह में केवल निचले स्तर के कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि नक्सली संगठन के बेहद अनुभवी और शातिर चेहरे भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सरेंडर करने वाले कैडरों में (High Ranking Maoist Leaders) जैसे एक संभागीय समिति सदस्य (DCM) और छह एरिया कमेटी सदस्य (ACM) शामिल हैं। इन खूंखार चेहरों पर 5.5 लाख रुपये से लेकर 27.5 लाख रुपये तक का भारी-भरकम इनाम था, जिससे इनकी संगठन में अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रशासन का मानवीय चेहरा और पुनर्वास की पहल
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बंदूक छोड़ने वाले इन पूर्व माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। सरकार की (Surrender and Rehabilitation Policy) के तहत इन सभी व्यक्तियों को तत्काल आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाएगी, ताकि वे अपनी नई जिंदगी की शुरुआत सम्मान के साथ कर सकें। प्रशासन का लक्ष्य है कि इन्हें केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि रोजगार और सामाजिक समर्थन भी प्रदान किया जाए ताकि वे दोबारा भटकने के लिए मजबूर न हों।
पुलिस महानिदेशक साझा करेंगे ऑपरेशन की बारीकियां
इस बड़े घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग में उत्साह का माहौल है और जल्द ही पुलिस महानिदेशक वाईबी खुराना इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी मीडिया से साझा कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि (State Intelligence Wing Coordination) की वजह से ही इतने बड़े स्तर पर नक्सलियों को बातचीत की मेज तक लाना मुमकिन हो पाया है। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण अन्य सक्रिय नक्सलियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि हिंसा का रास्ता केवल तबाही की ओर ले जाता है।
ओडिशा के प्रभावित जिलों में सुरक्षा का नया तंत्र
ओडिशा के कालाहांडी, कंधमाल, मलकानगिरी और रायगढ़ा जैसे जिले लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद की मार झेल रहे हैं। इन क्षेत्रों में (LWE Affected Districts in Odisha) की पहचान कर सरकार ने विकास कार्यों को तेज कर दिया है। माओवादियों का प्रभाव कम करने के लिए सड़कों का जाल बिछाने और शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, जिसका सीधा असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है और लोग हिंसा से ऊबकर विकास की बात कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सीमा पर नक्सलियों के गढ़ में बड़ी सेंध
मलकानगिरी और कोरापुट जैसे जिले सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे हैं, जो वर्षों से माओवादियों के सुरक्षित ठिकाने यानी ‘गढ़’ के रूप में जाने जाते रहे हैं। सुरक्षा बलों ने अब (Inter-State Border Security Management) को इतना मजबूत कर दिया है कि नक्सलियों की रसद और आवाजाही पर कड़ी चोट पहुंची है। सीमावर्ती इलाकों में बढ़ती चौकसी और गश्त के कारण माओवादी संगठन अब बिखरने लगे हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस तरह के सामूहिक आत्मसमर्पण देखने को मिल रहे हैं।
समाज की मुख्यधारा में लौटने की बढ़ती ललक
हाल के महीनों में ओडिशा ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न नक्सल प्रभावित राज्यों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की दर में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। यह बदलाव (Naxalism Internal Conflict) और विचारधारा के प्रति बढ़ते मोहभंग को दर्शाता है। युवाओं को अब समझ आने लगा है कि जंगलों में छिपकर रहने से बेहतर है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनें और अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण करें।
अमन और चैन की ओर बढ़ता नया ओडिशा
मलकानगिरी की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही नीति और नियत के साथ काम किया जाए, तो सबसे कठिन चुनौतियों का समाधान भी संभव है। यह (Mainstream Society Integration) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ खौफ पैदा करने वाले हाथों ने अब विकास की जिम्मेदारी उठाई है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में बचे हुए माओवादी भी इसी तरह का साहसी कदम उठाएंगे और ओडिशा को पूरी तरह से उग्रवाद मुक्त बनाने में अपना सहयोग देंगे।



