ManipurViolence – बिष्णुपुर में हिंसा के बाद शांति, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण
ManipurViolence – मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन इलाके में तनाव कम नहीं हुआ है। मंगलवार को हुई एक दर्दनाक घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया, जिसके बाद गुस्से और असंतोष का माहौल फैल गया। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि स्थिति और न बिगड़े।

घर पर बम हमला, दो मासूमों की मौत
यह पूरा मामला मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके से सामने आया, जहां संदिग्ध उग्रवादियों ने एक घर को निशाना बनाते हुए बम फेंका। उस समय परिवार घर के भीतर सो रहा था। इस हमले में एक पांच वर्षीय बच्चे और उसकी छह महीने की बहन की जान चली गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस घटना ने पूरे इलाके में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया और लोगों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।
सीआरपीएफ कैंप पर भीड़ का हमला
घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। करीब 400 लोगों की भीड़ ने गुस्से में आकर सीआरपीएफ के एक कैंप को निशाना बनाया। स्थिति को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को बल प्रयोग करना पड़ा। गोलीबारी में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जबकि लगभग 20 लोग घायल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा एजेंसियां उग्रवादियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में असफल रही हैं।
अन्य जिलों में भी बढ़ा तनाव
हिंसा का असर केवल बिष्णुपुर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंफाल ईस्ट और इंफाल वेस्ट जिलों में भी तनाव फैल गया। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं और टायर जलाकर विरोध जताया। कुछ स्थानों पर पुलिस चौकियों में तोड़फोड़ की गई, जबकि वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
कर्फ्यू और इंटरनेट सेवाएं बंद
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कई जिलों में कर्फ्यू लागू कर दिया है, जिनमें इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, बिष्णुपुर, थौबल और काकचिंग शामिल हैं। इसके साथ ही इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं, ताकि अफवाहों पर रोक लगाई जा सके। सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
सरकार और एजेंसियों की सक्रियता
बुधवार सुबह से कोई नई हिंसक घटना सामने नहीं आई है, लेकिन हालात अब भी नाजुक बने हुए हैं। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी से कराई जाएगी। सभी दलों ने मिलकर शांति बनाए रखने और लोगों से संयम बरतने की अपील की है।
पिछले लंबे समय से जारी है संघर्ष
मणिपुर में पिछले वर्ष मई से ही मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष जारी है। इस हिंसा में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। हाल की घटना ने एक बार फिर इस संवेदनशील स्थिति को उजागर कर दिया है, जिससे राज्य में स्थायी शांति की चुनौती और भी जटिल हो गई है।



