LokSabhaSpeaker – ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बदला टीएमसी का रुख
LokSabhaSpeaker – लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाए जा रहे प्रस्ताव को लेकर विपक्षी राजनीति में नया मोड़ आया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस अब इस प्रस्ताव पर विपक्ष के साथ खड़ी होने को तैयार दिखाई दे रही है। पहले इस मुद्दे पर पार्टी ने दूरी बनाए रखने का संकेत दिया था, लेकिन अब सूत्रों का कहना है कि टीएमसी ने अपना रुख बदलते हुए विपक्षी दलों के प्रस्ताव का समर्थन करने पर सहमति जताई है। इस घटनाक्रम से संसद के आगामी सत्र में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

सोमवार को सदन में पेश हो सकता है प्रस्ताव
लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, अध्यक्ष को पद से हटाने से जुड़े प्रस्ताव का नोटिस सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया गया है। संसदीय नियमों के मुताबिक, जब यह नोटिस सदन में पेश किया जाएगा तब कम से कम 50 सांसदों को अपने स्थान पर खड़े होकर इसका समर्थन करना होगा।
यदि आवश्यक संख्या में सदस्य समर्थन में खड़े हो जाते हैं, तो प्रस्ताव औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया जाएगा और उस पर चर्चा तथा मतदान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि अगर 50 सांसदों का समर्थन नहीं मिलता है, तो प्रस्ताव पेश ही नहीं किया जा सकेगा। यह प्रक्रिया संसद की कार्यप्रणाली में एक महत्वपूर्ण चरण मानी जाती है, क्योंकि इसके बाद ही सदन में औपचारिक बहस संभव होती है।
संख्या बल के कारण परिणाम को लेकर अनुमान
संसद की कार्यसूची में सोमवार के दिन इस प्रस्ताव को ही मुख्य विषय के रूप में शामिल किया गया है। इस बीच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने सांसदों को इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सदन में मौजूद रहने के निर्देश जारी किए हैं।
लोकसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रस्ताव पारित होना कठिन दिखाई देता है। सदन में सरकार के पक्ष में पर्याप्त सांसद हैं, जिससे मतदान की स्थिति में प्रस्ताव के असफल रहने की संभावना अधिक मानी जा रही है। फिर भी विपक्ष का कहना है कि वह इस मुद्दे पर सदन में अपनी बात विस्तार से रखना चाहता है।
कांग्रेस सांसदों ने दिया है प्रस्ताव का नोटिस
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में बताया था कि यह प्रस्ताव 9 मार्च को सदन के सामने रखा जा सकता है। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस के तीन सांसद—मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि—ने इस प्रस्ताव के लिए औपचारिक नोटिस दिया है।
प्रस्ताव के मसौदे में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में विपक्ष के नेताओं को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। इसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी सदस्यों को बोलने की अनुमति नहीं दिए जाने और कुछ महिला सांसदों से जुड़े मामलों में कथित अनुचित टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है।
विपक्ष ने लगाए निष्पक्षता पर सवाल
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि जब विपक्षी सांसदों ने जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने की कोशिश की, तब आठ सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि दूसरी ओर सत्तापक्ष के कुछ सांसदों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर समान सख्ती नहीं दिखाई गई।
विपक्षी दलों का कहना है कि इन घटनाओं के कारण उन्हें यह महसूस हुआ कि सदन की कार्यवाही में अपेक्षित निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अध्यक्ष के कुछ फैसलों से सांसदों के अधिकारों और संसदीय परंपराओं पर असर पड़ा है, जिससे लोकतांत्रिक चर्चा की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
चर्चा के दौरान अध्यक्ष की भूमिका को लेकर नियम
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, जिस समय इस तरह के प्रस्ताव पर सदन में विचार किया जाता है, उस दौरान लोकसभा अध्यक्ष सदन में उपस्थित रह सकते हैं। उन्हें अपने पक्ष में स्पष्टीकरण देने का भी अधिकार होता है और वे मतदान में भाग भी ले सकते हैं।
हालांकि जिस विषय पर प्रस्ताव लाया गया हो, उस पर चर्चा के दौरान अध्यक्ष स्वयं सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। ऐसी स्थिति में सदन की कार्यवाही किसी अन्य सदस्य द्वारा संचालित की जाती है। संसदीय नियमों में यह स्पष्ट नहीं है कि उस समय अध्यक्ष सदन में किस स्थान पर बैठेंगे, लेकिन सामान्य तौर पर माना जाता है कि वे सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं।



