LiquorPolicyCase – केजरीवाल को राहत पर अन्ना हजारे की प्रतिक्रिया
LiquorPolicyCase – दिल्ली की एक अदालत द्वारा कथित आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के बाद इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी अदालत के निर्णय पर टिप्पणी करते हुए न्यायपालिका के प्रति सम्मान जताया है। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के रालेगण सिद्धि में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला सर्वोपरि है और लोकतंत्र में उसे स्वीकार करना चाहिए।

न्यायपालिका की भूमिका पर जोर
अन्ना हजारे ने कहा कि भारत जैसे बड़े और विविध देश में व्यवस्था बनाए रखने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके मुताबिक, यदि न्याय व्यवस्था मजबूत न हो तो कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत का निर्णय अंतिम होता है और उस पर विश्वास बनाए रखना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि किसी भी मामले में अंतिम शब्द न्यायालय का ही होता है।
पुरानी टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण
मार्च 2024 में जब अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी, तब अन्ना हजारे ने सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी। उस समय उन्होंने इसे जनविश्वास के विपरीत बताया था। शुक्रवार को जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उस वक्त मामला अदालत में लंबित था और आरोपों की स्थिति अलग थी। अब जब न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है और आरोप साबित नहीं हुए, तो उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय और परिस्थिति के अनुसार राय बदलना स्वाभाविक है, क्योंकि अंतिम निर्णय न्यायपालिका का ही होता है।
आंदोलन के दिनों की याद
अन्ना हजारे ने 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को याद करते हुए कहा कि उस समय अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया उनके साथ सक्रिय रूप से जुड़े थे। वह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा और राजनीतिक परिदृश्य पर भी उसका असर पड़ा। हालांकि अन्ना ने दोहराया कि जब आंदोलन से राजनीतिक दल का गठन हुआ तो उन्होंने खुद को उससे अलग कर लिया था। उनका कहना था कि उन्होंने हमेशा सामाजिक आंदोलन को राजनीति से अलग रखने की कोशिश की।
भविष्य के लिए सलाह
जब उनसे पूछा गया कि वह केजरीवाल को क्या संदेश देना चाहेंगे, तो उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वालों को समाज और देशहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। व्यक्तिगत या दलगत हित से ऊपर उठकर काम करना ही राजनीति का उद्देश्य होना चाहिए।
अदालत की टिप्पणी और मामला
इस मामले में अदालत ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि शराब नीति तैयार करने में किसी व्यापक आपराधिक साजिश के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। अरविंद केजरीवाल को मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने कई महीनों तक न्यायिक हिरासत में समय बिताया। अब अदालत के फैसले के बाद उन्हें इस प्रकरण में राहत मिल गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय का असर आगामी चुनावी परिदृश्य पर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम प्रभाव का आकलन समय के साथ ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, अदालत के आदेश के बाद इस प्रकरण में कानूनी स्थिति साफ हो गई है और सभी पक्ष न्यायालय के निर्णय को स्वीकार करने की बात कह रहे हैं।



