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JudiciaryAdvice – सीजेआई ने छात्रों को दी विशेषज्ञता पर सीख

JudiciaryAdvice – देश के प्रधान न्यायाधीश ने कानून के विद्यार्थियों को करियर की दिशा चुनने को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, गांधीनगर में आयोजित 16वें दीक्षांत समारोह में संबोधन के दौरान उन्होंने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए समझाया कि हर व्यक्ति को अपनी विशेष क्षमता पहचाननी चाहिए। उनका कहना था कि जैसे खेल की दुनिया में हर खिलाड़ी की एक तय भूमिका होती है, वैसे ही वकालत के पेशे में भी सभी क्षेत्रों में समान दक्षता संभव नहीं है।

भूमिका स्पष्ट हो तो टीम बनती है मजबूत

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी सफल टीम की नींव स्पष्ट जिम्मेदारियों पर टिकी होती है। जब हर सदस्य को अपनी ताकत और सीमा का पता हो, तभी सामूहिक सफलता संभव होती है। उन्होंने भारतीय टी20 टीम का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई यह अपेक्षा नहीं करता कि एक प्रमुख बल्लेबाज अंतिम ओवरों में गेंदबाजी संभाले, या एक विशेषज्ञ गेंदबाज लक्ष्य का पीछा करते हुए मुख्य भूमिका निभाए।

उनका संकेत साफ था कि पेशेवर जीवन में भी अपनी योग्यता के अनुरूप क्षेत्र चुनना समझदारी है। उन्होंने छात्रों से कहा कि कानून का क्षेत्र व्यापक जरूर है, लेकिन हर वकील का सफर अलग होता है।

कानून के पेशे में संतुलन की जरूरत

प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि वकालत ऐसा पेशा नहीं है जहां हर काम को समान रूप से करने की कोशिश करने वालों को हमेशा पहचान मिलती हो। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे शुरुआती वर्षों में ही यह समझने की कोशिश करें कि उनकी रुचि और दक्षता किस दिशा में है।

उनका मानना था कि यह आत्ममंथन एक दिन में पूरा नहीं होता, बल्कि समय के साथ विकसित होता है। जो लोग अपनी वास्तविक क्षमता को पहचान लेते हैं और उसी दिशा में निरंतर काम करते हैं, वही अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं।

दिखावे से ज्यादा जरूरी है विश्वसनीयता

संबोधन के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि पेशेवर जीवन में हर दिन बड़ी उपलब्धि हासिल करना जरूरी नहीं है। असली कसौटी कठिन परिस्थितियों में आपकी विश्वसनीयता और ईमानदारी होती है। उन्होंने कहा कि जो वकील दिखावे से दूर रहकर अपने काम पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वही लंबे समय में भरोसेमंद पहचान बना पाते हैं।

उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि करियर के पहले कुछ वर्षों में भ्रम होना स्वाभाविक है, लेकिन खुद से लगातार सवाल पूछते रहना जरूरी है। यही प्रक्रिया उन्हें सही दिशा में ले जाएगी।

दीक्षांत समारोह में उत्साह का माहौल

गांधीनगर स्थित विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अतिथि मौजूद थे। प्रधान न्यायाधीश के संबोधन को विद्यार्थियों ने गंभीरता से सुना। कई छात्रों ने इसे अपने करियर के लिए मार्गदर्शक संदेश बताया।

उनका यह वक्तव्य ऐसे समय आया है जब कानून के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और नए वकीलों के सामने विविध विकल्प मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट लक्ष्य और केंद्रित तैयारी ही लंबे समय तक सफलता दिला सकती है।

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