Indian Athletes Train Harassment News: भारत के चैंपियंस का सिस्टम ने उतारा दम, पोल वॉल्टर्स को ट्रेन से धकेला…
Indian Athletes Train Harassment News: भारतीय खेल जगत से एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर खेल प्रेमी का सिर शर्म से झुक जाएगा। देश का नाम रोशन करने वाले राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी पोल वॉल्टर देव मीना और यूनिवर्सिटी चैंपियन कुलदीप यादव को सोमवार के दिन एक ट्रेन से जबरन नीचे उतार दिया गया। इन खिलाड़ियों को (National Athlete Travel Issues) पनवेल स्टेशन की तपती दोपहरी और रात के सन्नाटे में करीब चार से पांच घंटे तक केवल इसलिए फंसा रहना पड़ा क्योंकि उनके पास उनके खेल के उपकरण थे। यह घटना उस समय हुई जब ये जांबाज एथलीट बंगलूरू में आयोजित ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतकर वापस लौट रहे थे।

दो लाख के पोल को बताया ‘अवैध सामान’
विवाद की शुरुआत तब हुई जब ट्रेन में तैनात टीटीई ने एथलीट्स के पास मौजूद पोल वॉल्ट पोल्स को ‘अनधिकृत सामान’ करार दे दिया। आपको बता दें कि ये पोल कोई साधारण डंडे नहीं होते, बल्कि इनकी कीमत (Professional Sports Equipment Cost) लगभग दो लाख रुपये प्रति पीस होती है। पांच मीटर लंबे ये फाइबरग्लास पोल्स एक एथलीट की जान होते हैं, जिनके बिना पोल वॉल्टिंग की कल्पना भी नहीं की जा सकती। टीटीई ने नियमों का हवाला देते हुए इन्हें ट्रेन में ले जाने से साफ मना कर दिया और खिलाड़ियों की एक न सुनी।
देव मीना का छलका दर्द और सिस्टम पर सवाल
अपनी बेबसी और गुस्से को जाहिर करते हुए देव मीना ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने भरे मन से कहा कि यदि एक इंटरनेशनल लेवल के एथलीट के साथ भारत में ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो (Athletes Mental Health and Support) हमारे देश के जूनियर खिलाड़ियों का भविष्य क्या होगा? देव ने बताया कि उन्होंने जुर्माना भरने और उच्च अधिकारियों से बात करने की भी विनती की, लेकिन उनकी हर दलील को खारिज कर दिया गया। एक खिलाड़ी के लिए उसके उपकरण उसकी तकनीक और शरीर के वजन के हिसाब से कस्टम बने होते हैं, जिन्हें वह कहीं छोड़ नहीं सकता।
जुर्माना भी भरा और जिल्लत भी झेली
घंटों तक चले इस गतिरोध के कारण खिलाड़ियों की भोपाल जाने वाली कनेक्टिंग ट्रेन भी छूट गई। अंततः भारी विवाद और मोटा जुर्माना वसूलने के बाद रेलवे ने उन्हें दूसरी ट्रेन में बैठने की अनुमति तो दी, लेकिन वहां भी (Railway Luggage Policy for Sports) अपमानजनक शर्तें थोप दी गईं। उनसे कहा गया कि यदि किसी भी यात्री ने इन पोल्स की लंबाई को लेकर शिकायत की, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह सुनकर ऐसा लगा मानो देश के गौरव नहीं बल्कि कोई अपराधी सफर कर रहे हों।
फ्लाइट से लेकर ट्रेन तक हर जगह वही हाल
गोल्ड मेडलिस्ट कुलदीप यादव, जिन्होंने बंगलूरू में 5.10 मीटर की छलांग लगाकर इतिहास रचा है, ने इस सिस्टम की कड़वी हकीकत बयां की। कुलदीप ने आरोप लगाया कि चाहे हवाई जहाज हो या ट्रेन, खिलाड़ियों को (International Sports Travel Logistics) हर जगह अपमानित होना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर खिलाड़ी अपने उपकरण सुरक्षित नहीं ले जा सकता, तो वह पदक की उम्मीद कैसे करे? उन्होंने स्पष्ट किया कि खिलाड़ी पैसे देने को तैयार हैं, बस उन्हें उनके कीमती सामान के लिए थोड़ी सी जगह और सम्मान चाहिए।
टूटी पोल के साथ जीता था गोल्ड मेडल
हैरानी की बात यह है कि कुलदीप यादव ने यह चैंपियनशिप उस पोल के साथ जीती थी जो एक प्रयास के दौरान बीच से क्रैक हो गई थी। उनकी मेहनत और जज्बे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि (Competitive Athletics Achievements India) विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने रिकॉर्ड बनाया। वर्तमान में देव मीना और कुलदीप यादव एक साथ अभ्यास कर रहे हैं ताकि भारत में पोल वॉल्टिंग के स्तर को वैश्विक ऊंचाइयों तक ले जाया जा सके, लेकिन इस तरह की घटनाएं उनकी हिम्मत तोड़ देती हैं।
2036 ओलंपिक का सपना और जमीनी हकीकत
सोशल मीडिया पर इस घटना ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है कि क्या भारत वाकई 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार है? एक तरफ सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े दावे (Olympic Infrastructure Readiness India) करती है, वहीं दूसरी तरफ चैंपियन खिलाड़ियों को प्लेटफॉर्म पर लावारिसों की तरह बैठना पड़ता है। यह विरोधाभास साफ बताता है कि कागजी योजनाओं और धरातल की व्यवस्थाओं के बीच अभी बहुत बड़ी खाई है जिसे पाटना बेहद जरूरी है।
क्या एशियन गेम्स का सपना होगा प्रभावित
देव मीना ने निराशा में यहां तक कह दिया कि ‘अब तो खेल ही खत्म हो गया’, क्योंकि इस मानसिक प्रताड़ना ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया है। जब खिलाड़ी का पूरा ध्यान अपनी तकनीक और ट्रेनिंग पर होना चाहिए, तब उसे (Asian Games Qualification Process) रेलवे के नियमों और टीटीई की सनक से लड़ना पड़ रहा है। अगर समय रहते खेल मंत्रालय और रेल मंत्रालय ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो आगामी एशियन गेम्स में भारत के पदक की उम्मीदों को गहरा धक्का लग सकता है।



