राष्ट्रीय

India Cyber Fraud Report: डिजिटल ठगी का मायाजाल, भारत ने छह वर्षों में गंवाए ₹52,976 करोड़

India Cyber Fraud Report: भारत में जैसे-जैसे डिजिटल क्रांति तेज हुई है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों का नेटवर्क भी घातक होता जा रहा है। गृह मंत्रालय की एजेंसी I4C की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह सालों में भारतीयों को (Financial Fraud) के कारण ₹52,976 करोड़ से अधिक का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यह आंकड़ा केवल उन मामलों का है जो दर्ज किए गए हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। निवेश के नाम पर धोखा और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीके लोगों की मेहनत की कमाई को पल भर में छीन रहे हैं।

India Cyber Fraud Report
WhatsApp Group Join Now

साल 2025: ठगी का रिकॉर्ड साल

आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि अकेले वर्ष 2025 में ही करीब ₹19,812 करोड़ की चपत लगी है। इस दौरान 21 लाख से अधिक (Cyber Complaints) दर्ज की गईं। यह ट्रेंड दर्शाता है कि अपराधी अब और अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2020 में यह नुकसान केवल ₹8.56 करोड़ था, जो महज पांच साल में हजारों गुना बढ़ गया है। यह वृद्धि हमारी डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे बड़े निशाने पर

राज्यवार आंकड़ों को देखें तो महाराष्ट्र साइबर ठगी का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहाँ ₹3,203 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु का नंबर आता है। उत्तर प्रदेश भी इस सूची में पीछे नहीं है, जहाँ (Online Scams) के जरिए ₹1,443 करोड़ की ठगी की गई। इन राज्यों में शहरीकरण और डिजिटल लेनदेन की अधिकता ने ठगों के लिए काम आसान कर दिया है। गुजरात और दिल्ली जैसे प्रदेश भी इस जाल में बुरी तरह फंसे हुए हैं।

फर्जी निवेश स्कीमों का जानलेवा लालच

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुल ठगी का 77% हिस्सा केवल फर्जी निवेश योजनाओं (Investment Scams) से जुड़ा है। अपराधी लोगों को कम समय में पैसा दोगुना करने या घर बैठे लाखों कमाने का लालच देते हैं। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड और सेक्सटॉर्शन जैसे हथकंडे भी अपनाए जा रहे हैं। लोगों का भोलापन और तकनीकी जानकारी का अभाव इन अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो रहा है।

अंतरराष्ट्रीय तार और दक्षिण-पूर्व एशिया का कनेक्शन

साइबर अपराध की जड़ें अब केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। 2025 में दर्ज हुई 45% शिकायतों के तार कंबोडिया, म्यांमार और लाओस जैसे (South-East Asian) देशों से जुड़े पाए गए हैं। वहां बैठे गिरोह भारतीय युवाओं को नौकरी का झांसा देकर बुलाते हैं और फिर उनसे जबरन साइबर ठगी करवाते हैं। जांच एजेंसियों के लिए इन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार जाकर अपराधियों को पकड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

जागरूकता ही एकमात्र बचाव

बढ़ते डिजिटलीकरण के इस युग में सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और भारी मुनाफे के वादों से बचें। सरकार (Cyber Security Awareness) के लिए कई अभियान चला रही है, लेकिन जब तक नागरिक स्वयं जागरूक नहीं होंगे, तब तक इस डिजिटल सेंधमारी को रोकना असंभव है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत 1930 हेल्प-लाइन नंबर पर देनी चाहिए।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.