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HRTC Bus Accident News: सरकाघाट में मौत को मात देकर लौटे मुसाफिर, बस के परखच्चे उड़े…

HRTC Bus Accident News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में शनिवार की सुबह एक खौफनाक मंजर लेकर आई जब सरकाघाट में एक दर्दनाक हादसा हुआ। यात्रियों से खचाखच भरी एचआरटीसी की बस अचानक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिससे (public transport safety) को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह पिसा हुआ नजर आया।

HRTC Bus Accident News
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सन्नाटे को चीरती चीखों ने दहलाया दिल

हादसे के वक्त बस में सवार यात्री गहरी नींद में थे या अपनी मंजिलों के सपने बुन रहे थे लेकिन अचानक हुए धमाके ने सब बदल दिया। बस के भीतर मची (emergency rescue operations) की पुकार सुनकर स्थानीय लोग तुरंत मौके की ओर दौड़े ताकि मलबे में दबे लोगों की जान बचाई जा सके। वहां का दृश्य इतना विचलित करने वाला था कि देखने वालों की रूह कांप गई और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

अस्पताल में घायलों की जिंदगी की जंग

इस भीषण सड़क हादसे में अब तक सात यात्रियों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि हुई है जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम (medical trauma care) के जरिए घायलों को राहत पहुंचाने की हर संभव कोशिश कर रही है ताकि उनकी स्थिति को स्थिर किया जा सके। घायलों के परिजनों को जैसे ही इस अनहोनी की सूचना मिली, अस्पताल परिसर में करुण क्रंदन गूंजने लगा।

प्रशासन और पुलिस की सक्रियता

हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं और राहत कार्य को तेज कर दिया। पुलिस अब इस (road accident investigation) के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह हादसा किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ या चालक की लापरवाही इसका मुख्य कारण थी। सड़क पर बिखरे कांच के टुकड़े और खून के धब्बे उस भयावह पल की गवाही दे रहे हैं।

हिमाचल की सड़कों पर बढ़ता खतरा

देवभूमि की घुमावदार सड़कों पर चलने वाली सरकारी बसें अक्सर हादसों का शिकार हो रही हैं जो यात्रियों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ाती हैं। सरकार को चाहिए कि वह (vehicle maintenance standards) को और सख्त करे ताकि पुरानी और खटारा बसों को सड़कों से हटाया जा सके। सरकाघाट की इस घटना ने एक बार फिर परिवहन विभाग को अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की चेतावनी दी है।

स्थानीय वीरों ने पेश की इंसानियत की मिसाल

जब तक सरकारी मदद पहुंचती, सरकाघाट के स्थानीय युवाओं ने अपनी जान की परवाह किए बिना बस की खिड़कियां तोड़कर लोगों को बाहर निकालना शुरू कर दिया था। इन लोगों की (heroic first responders) वाली भूमिका की वजह से ही कई लोगों की जान समय रहते बच पाई। घायलों को अपनी निजी गाड़ियों में बिठाकर अस्पताल पहुंचाना मानवता का सबसे बड़ा उदाहरण पेश कर गया।

चश्मदीदों की जुबानी तबाही का मंजर

बस में सवार एक यात्री ने बताया कि मोड़ काटते समय अचानक बस लहराने लगी और ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया। ऐसी (driver negligence) की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि पहाड़ी रास्तों पर जरा सी चूक बड़ी तबाही का कारण बनती है। यात्रियों का कहना है कि अगर बस चंद फीट और आगे खिसक जाती तो यह एक बड़ी खाई में गिर सकती थी।

घायलों की मदद के लिए आगे आया विभाग

हिमाचल पथ परिवहन निगम के उच्च अधिकारियों ने घटना पर दुख व्यक्त किया है और प्रभावितों को नियमानुसार राहत राशि देने की बात कही है। विभाग अब (passenger insurance claims) की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विचार कर रहा है ताकि पीड़ित परिवारों को आर्थिक बोझ न सहना पड़े। हालांकि, यात्रियों का कहना है कि पैसा जान की भरपाई नहीं कर सकता।

खराब मौसम या मानवीय भूल?

सर्दियों के इस मौसम में सुबह के वक्त धुंध और कोहरा भी विजिबिलिटी को कम कर देता है जो दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण बनता है। क्या इस हादसे में (poor weather conditions) की कोई भूमिका थी, यह फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। सड़कों पर ब्लैक स्पॉट को चिन्हित करना अब प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

सुरक्षित सफर का सपना कब होगा पूरा?

हिमाचल के दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एचआरटीसी की बसें ही जीवनरेखा हैं लेकिन बार-बार होने वाले हादसे इस भरोसे को तोड़ रहे हैं। (transport policy reforms) की तत्काल आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी और मासूम का खून इन सड़कों पर न बहे। सरकाघाट की यह चीखें लंबे समय तक सिस्टम को झकझोरती रहेंगी।

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