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Heritage – रायगढ़ किले के बुर्ज में छत के मिले संकेत, पुनर्निर्माण की तैयारी

Heritage – महाराष्ट्र के ऐतिहासिक रायगढ़ किले से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है, जिसने इसके स्थापत्य और सैन्य महत्व को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। किले के खुबलाधा बुर्ज में संरक्षण कार्य के दौरान लकड़ी के स्तंभों के अवशेष और उनके जोड़ मिलने से यह संकेत मिला है कि इस बुर्ज पर कभी छत मौजूद थी। यह विशेषता इसे किले के अन्य बुर्जों से अलग बनाती है और इसके उपयोग को लेकर नए पहलुओं को उजागर करती है।

संरचना के उपयोग को लेकर नए संकेत

रायगढ़ विकास प्राधिकरण (आरडीए) के अध्यक्ष संभाजी छत्रपति ने इस खोज को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह बुर्ज केवल एक साधारण रक्षा संरचना नहीं था। उनके अनुसार, यहां मिले साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि यह स्थान संभवतः एक सर्व-मौसम निगरानी चौकी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। लकड़ी के स्तंभों के आधार पत्थर इस बात की पुष्टि करते हैं कि इस बुर्ज पर स्थायी छत रही होगी, जो किले की अन्य संरचनाओं में देखने को नहीं मिलती।

एएसआई से अनुमति की तैयारी

संभाजी छत्रपति ने बताया कि इस खोज के आधार पर अब खुबलाधा बुर्ज को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से अनुमति मांगी जाएगी। उनका कहना है कि ऐतिहासिक प्रमाण मिलने के बाद इस तरह के पुनर्निर्माण से किले की विरासत को और बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सकता है।

मराठा इतिहास में रायगढ़ का महत्व

रायगढ़ किला मराठा साम्राज्य के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। यह वही स्थान है जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक 6 जून 1674 को हुआ था और यहीं से हिंदवी स्वराज्य की औपचारिक शुरुआत हुई थी। पहाड़ी पर स्थित यह किला न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि इसकी सैन्य संरचना भी उस समय की रणनीतिक सोच को दर्शाती है। यही कारण है कि इसे मराठा सैन्य परिदृश्य की प्रमुख धरोहरों में शामिल किया गया है।

संरक्षण कार्य में सामने आई विशेषता

हाल ही में आरडीए ने मुख्य किले के नीचे स्थित खुबलाधा बुर्ज के संरक्षण का काम पूरा किया। इसी दौरान यह अनोखी संरचनात्मक विशेषता सामने आई। इतिहासकारों के अनुसार, लगभग 27 फीट ऊंचा और 50 फीट परिधि वाला यह बुर्ज किले की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है। यहां तोपों के लिए बनाए गए स्थान भी मिले हैं, जो इसके सैन्य उपयोग की पुष्टि करते हैं।

पुनर्निर्माण की योजना और आगे की प्रक्रिया

आरडीए अब इस बुर्ज पर छत के पुनर्निर्माण को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है। संभाजी छत्रपति ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस दिशा में कदम उठाया जाएगा। हालांकि, किसी भी तरह के निर्माण कार्य से पहले एएसआई की मंजूरी अनिवार्य होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना साकार होती है, तो यह न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक नया आकर्षण बन सकता है।

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