HateSpeechCase – सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को दी राहत
HateSpeechCase – सुप्रीम कोर्ट ने कथित हेट स्पीच से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को राहत देते हुए कहा है कि उनके खिलाफ उपलब्ध सामग्री के आधार पर कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। अदालत ने यह फैसला 29 अप्रैल को सुनाया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद भाषणों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ऐसा कोई स्पष्ट आधार नहीं मिला, जिससे आपराधिक मामला बनता हो।

अदालत ने भाषणों की प्रकृति पर क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित भाषण किसी विशेष समुदाय को सीधे निशाना बनाने वाले नहीं पाए गए। अदालत के अनुसार, भाषणों में ऐसा कोई स्पष्ट तत्व भी नहीं दिखा जिससे हिंसा भड़कने या सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका सिद्ध हो सके। पीठ ने यह भी माना कि दिल्ली हाईकोर्ट का अंतिम निष्कर्ष सही था, हालांकि उसके फैसले में अपनाई गई कानूनी दलीलों से अदालत पूरी तरह सहमत नहीं थी।
सैंक्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट राय
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकारी अनुमति यानी सैंक्शन के मुद्दे पर भी अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने से पहले सैंक्शन आवश्यक नहीं होता। अदालत के मुताबिक, अनुमति की जरूरत उस चरण में आती है जब सक्षम अदालत मामले का औपचारिक संज्ञान लेती है। न्यायालय ने कहा कि यदि जांच शुरू होने से पहले ही सैंक्शन को अनिवार्य बना दिया जाए, तो इससे जांच एजेंसियों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और प्रारंभिक जांच बाधित हो सकती है।
हेट स्पीच पर अदालत की व्यापक टिप्पणी
फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की भाषा संविधान में निहित भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की भावना के विपरीत है। न्यायालय ने माना कि ऐसे बयान समाज की नैतिक संरचना को कमजोर कर सकते हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान कानूनी ढांचा इस तरह के मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त है और फिलहाल नए कानून की आवश्यकता नहीं दिखाई देती।
2020 के शाहीन बाग प्रदर्शन से जुड़ा था मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन के दौरान दिए गए बयानों से जुड़ा था। आरोप था कि अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा ने जनवरी 2020 में चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे बयान दिए थे, जिन्हें भड़काऊ माना गया। इस मामले को लेकर CPI(M) नेताओं बृंदा करात और के एम तिवारी ने शिकायत दर्ज कराते हुए एफआईआर की मांग की थी।
निचली अदालत और हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2020 में शिकायत को खारिज कर दिया था। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन वहां भी याचिका को 2022 में निरस्त कर दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में दोनों नेताओं को बड़ी कानूनी राहत मिली है।