GlobalOrder – बदलती विश्व व्यवस्था पर बोले एस जयशंकर, कोई देश पूरी तरह हावी नहीं
GlobalOrder – विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा समय में दुनिया की शक्ति संरचना तेजी से बदल रही है और अब ऐसा कोई देश नहीं है जो हर क्षेत्र में पूरी तरह से प्रभुत्व रखता हो। उन्होंने वैश्विक राजनीति में उभर रहे नए संतुलन की ओर संकेत करते हुए कहा कि बीते दशकों में जिस स्थायी विश्व व्यवस्था की कल्पना की गई थी, वह व्यवहारिक रूप से संभव नहीं थी। नई परिस्थितियों में शक्ति कई देशों और क्षेत्रों में फैल चुकी है।

रायसीना डायलॉग में रखे विचार
दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान विदेश मंत्री ने वैश्विक शासन व्यवस्था में आए बदलावों पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि 20वीं सदी के मध्य या शीत युद्ध के अंत के बाद जो वैश्विक व्यवस्था बनी थी, उसे स्थायी मान लेना एक अवास्तविक धारणा थी।
जयशंकर ने कहा कि यदि पिछले 70 वर्षों को व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाए तो यह मानव इतिहास का बहुत छोटा हिस्सा है। भारत जैसे देश के हजारों वर्षों के इतिहास को देखते हुए दुनिया का समय के साथ बदलना स्वाभाविक है। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था लगातार विकसित होती रहती है और उसे स्थिर मान लेना वास्तविकता से दूर है।
तकनीक और जनसंख्या बदलाव की बड़ी भूमिका
विदेश मंत्री के अनुसार मौजूदा वैश्विक बदलावों के पीछे दो प्रमुख कारक हैं—तकनीक और जनसंख्या संरचना। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति ने देशों की क्षमताओं को नए तरीके से परिभाषित किया है, जबकि जनसंख्या में हो रहे बदलाव भी राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों को प्रभावित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यही दोनों कारक वैश्विक परिदृश्य को सबसे अधिक प्रभावित करेंगे। तकनीक के क्षेत्र में तेज विकास ने नए अवसर पैदा किए हैं, वहीं विभिन्न देशों की जनसंख्या संरचना भी उनकी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को प्रभावित कर रही है।
अमेरिका केंद्रित विश्लेषण पर टिप्पणी
जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति का विश्लेषण अक्सर अमेरिका के इर्द-गिर्द किया जाता है, लेकिन वर्तमान स्थिति कहीं अधिक जटिल है। उनके अनुसार दुनिया धीरे-धीरे बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां अलग-अलग देश और क्षेत्र विभिन्न क्षेत्रों में अपनी ताकत दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक व्यवस्था में शक्ति का वितरण पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है। अलग-अलग देशों की ताकत अलग-अलग क्षेत्रों में दिखाई देती है, जिससे किसी एक देश के लिए हर क्षेत्र में पूरी तरह प्रभुत्व बनाए रखना संभव नहीं रह गया है।
शक्ति की परिभाषा में आया बदलाव
विदेश मंत्री ने कहा कि आज वैश्विक शक्ति को केवल आर्थिक आकार या सैन्य क्षमता के आधार पर नहीं समझा जा सकता। आधुनिक समय में तकनीक, नवाचार, जनसंख्या संरचना और कूटनीतिक प्रभाव जैसे कई अन्य तत्व भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ देश तकनीक के क्षेत्र में आगे हैं, जबकि कुछ देश आर्थिक क्षमता या रणनीतिक प्रभाव में मजबूत हैं। इसी कारण दुनिया की शक्ति संरचना अब कई केंद्रों में विभाजित दिखाई देती है।
जयशंकर के अनुसार यह परिवर्तन वैश्विक राजनीति की स्वाभाविक प्रक्रिया है। बदलती परिस्थितियों में देशों को नई चुनौतियों और अवसरों को समझते हुए अपनी रणनीतियों को भी उसी के अनुरूप ढालना होगा।



