EnforcementDirectorate – सबरीमाला सोना प्रकरण में पूर्व सचिव ईडी के समक्ष पेश
EnforcementDirectorate – सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोना गुमशुदगी और उससे संबंधित धन शोधन जांच के मामले में सोमवार को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की पूर्व सचिव एस. जयश्री प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष उपस्थित हुईं। अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी द्वारा जारी समन के बाद वह सुबह लगभग 10 बजे पूछताछ के लिए कार्यालय पहुंचीं। यह मामला पहले से विशेष जांच दल की निगरानी में है और अब धन शोधन के पहलू की अलग से जांच की जा रही है।

मनी लॉन्ड्रिंग जांच में नाम दर्ज
अधिकारियों ने बताया कि मंदिर के द्वारपाल की थालियों से कथित तौर पर सोना गायब होने के प्रकरण में जब धन के लेनदेन की परतें सामने आईं, तो प्रवर्तन निदेशालय ने अलग से मामला दर्ज किया। इसी के तहत जयश्री का नाम भी आरोपी के रूप में जोड़ा गया है। इससे पहले इसी मामले में बोर्ड के कुछ अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ की जा चुकी है।
ईडी कार्यालय में पेशी
समन मिलने के बाद जयश्री तय समय पर जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित हुईं। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि मंदिर की कलाकृतियों को दोबारा पॉलिश के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया में कौन-कौन से प्रशासनिक निर्णय लिए गए और उस दौरान सोने की मात्रा को लेकर क्या रिकॉर्ड दर्ज किया गया। एजेंसी पहले एस. श्रीकुमार और मुरारी बाबू सहित अन्य संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ कर चुकी है।
2019 की प्रक्रिया पर उठे सवाल
मामले की जड़ वर्ष 2019 में की गई उस प्रक्रिया से जुड़ी है, जब सबरीमाला मंदिर की कुछ कलाकृतियों को पुनः पॉलिश के लिए भेजा गया था। आरोप है कि उसी दौरान कुछ सोना कथित रूप से कम पाया गया। उस समय जयश्री त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड में सचिव पद पर कार्यरत थीं। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि उस अवधि में प्रशासनिक जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है।
सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत
जयश्री को इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय से अंतरिम संरक्षण प्राप्त है। अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से अस्थायी राहत दी है, जिससे वह जांच में सहयोग कर सकें। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि जांच प्रक्रिया पर रोक लगी है। एजेंसियां नियमित कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ और दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
बोर्ड के निर्देशों का हवाला
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने पक्ष में जयश्री ने कहा है कि उन्होंने सभी निर्णय बोर्ड के निर्देशों के अनुसार लिए थे। उनका दावा है कि व्यक्तिगत स्तर पर कोई स्वतंत्र निर्णय नहीं लिया गया, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया गया। अब जांच एजेंसियां इन दावों की पुष्टि के लिए रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान का मिलान कर रही हैं।
दूसरे मामले से अलग स्थिति
श्रीकोविल के दरवाजों की चौखट से कथित तौर पर सोना गायब होने से जुड़े एक अन्य मामले में जयश्री को आरोपी नहीं बनाया गया है। उस प्रकरण की जांच भी विशेष जांच दल कर रहा है, लेकिन दोनों मामलों की प्रकृति अलग बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग की जा रही है।
जांच पर टिकी निगाहें
सबरीमाला मंदिर से जुड़ा यह मामला धार्मिक आस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों से संबंधित होने के कारण संवेदनशील माना जा रहा है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, अभिलेखों और निर्णय प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा कर रही हैं। फिलहाल एजेंसियों की कार्रवाई जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।



