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राष्ट्रीय

ElectionCampaign – पुडुचेरी में रंगासामी का शांत प्रचार बना चर्चा का केंद्र

ElectionCampaign – पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म है। इस बीच मुख्यमंत्री एन रंगासामी का प्रचार तरीका बाकी नेताओं से अलग नजर आ रहा है। 75 वर्ष की उम्र में भी वे बेहद सादगी के साथ घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। सफेद धोती और लंबी शर्ट में नजर आने वाले रंगासामी न केवल वोट मांगते हैं, बल्कि अपनी सरकार की योजनाओं के पर्चे खुद बांटते हुए भी दिखते हैं, जो उनके अभियान को एक अलग पहचान देता है।

जनता से सीधा संवाद बना खास

रंगासामी का चुनाव प्रचार केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई जगहों पर सीधे संवाद का माध्यम बन जाता है। उनके पास पहुंचने वाले लोग अपनी समस्याएं खुलकर साझा करते हैं। कोई अपने समुदाय के लिए आरक्षण की मांग करता है तो कोई आवास से जुड़ी परेशानियां बताता है। मुख्यमंत्री हर व्यक्ति की बात ध्यान से सुनते हैं और मौके पर ही समाधान का आश्वासन देते हैं। इस तरह उनका प्रचार अभियान एक तरह की जन-सुनवाई में बदल जाता है, जिससे लोगों को सीधे जुड़ाव का एहसास होता है।

सादगी और संयम से बनी अलग पहचान

राजनीतिक माहौल में जहां अक्सर तीखे बयान और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं, वहीं रंगासामी का अंदाज काफी शांत और संतुलित रहता है। वे विरोधियों पर भी संयमित भाषा में ही प्रतिक्रिया देते हैं। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें सम्मानजनक उपनामों से पुकारते हैं और एक सहज नेता के रूप में देखते हैं। स्थानीय लोगों के बीच उनकी छवि ऐसे जनप्रतिनिधि की है, जो हमेशा उपलब्ध रहते हैं और किसी भी निमंत्रण को नजरअंदाज नहीं करते।

आध्यात्मिकता से जुड़ी जीवनशैली

रंगासामी की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक धार्मिक और अनुशासित व्यक्ति के तौर पर भी है। वे संत अप्पा पैथियम स्वामीगल के अनुयायी हैं और अक्सर माथे पर भस्म लगाए नजर आते हैं। उनके प्रचार अभियान में भी उनके आध्यात्मिक झुकाव की झलक दिखाई देती है। उनकी दिनचर्या में पूजा, मौन व्रत और अन्नदान जैसी गतिविधियां शामिल हैं, जिन्हें स्थानीय लोग अच्छी तरह जानते हैं।

स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़

उनके निवास क्षेत्र और आसपास के इलाकों में लोगों को उनकी दिनचर्या तक की जानकारी रहती है। यह बताता है कि उनका जनता से कितना गहरा जुड़ाव है। कई बार लोग यह भी सटीक बता देते हैं कि वे किस समय कहां मिलेंगे। इस तरह का विश्वास और पहुंच किसी भी नेता के लिए बड़ी राजनीतिक ताकत मानी जाती है, जो चुनावी समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

राजनीतिक सफर और सामाजिक आधार

करीब चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन में रंगासामी ने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे वन्नियार समुदाय से आते हैं और पहली बार 2001 में मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद अलग-अलग समय पर उन्होंने कई बार इस पद को संभाला। कांग्रेस से राजनीतिक शुरुआत करने के बाद उन्होंने 2011 में अपनी पार्टी बनाई और राज्य की राजनीति में अलग स्थान स्थापित किया।

चुनावी मुकाबला और रणनीति

इस बार पुडुचेरी में मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है। सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों ने पूरी ताकत झोंक दी है। जहां एक ओर सत्ताधारी दल अपनी उपलब्धियों के आधार पर वोट मांग रहा है, वहीं विपक्ष बदलाव के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहा है।

भरोसे और संपर्क पर टिकी उम्मीद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद रंगासामी अपनी सादगी, व्यक्तिगत संपर्क और भरोसे की राजनीति पर भरोसा जता रहे हैं। उनका शांत और सहज प्रचार शैली उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाती है और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।

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