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ElectionAdsBan – केरल चुनाव के दौरान दो दिन प्रिंट विज्ञापनों पर रोक

ElectionAdsBan – केरल में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र चुनाव आयोग ने प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापनों को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान से एक दिन पहले और मतदान के दिन, यानी 8 और 9 अप्रैल को किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार से जुड़े विज्ञापन अखबारों में प्रकाशित नहीं किए जा सकेंगे। यह निर्णय चुनाव प्रक्रिया के अंतिम चरण को निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

चुनाव आयोग ने क्यों लगाया प्रतिबंध

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी रतन यू केलकर द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मतदान से ठीक पहले प्रकाशित होने वाले विज्ञापन कई बार मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर यदि इनमें भ्रामक या विवादित सामग्री हो, तो विपक्षी पक्ष को जवाब देने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इसी कारण आयोग ने इस अवधि में विज्ञापनों पर रोक लगाकर चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की है।

मीडिया प्रमाणन समिति की भूमिका

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी राजनीतिक विज्ञापन को प्रकाशित करने से पहले मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। यह समिति इस बात की जांच करती है कि विज्ञापन की सामग्री तथ्यों पर आधारित हो और उसमें किसी भी प्रकार की भड़काऊ या आपत्तिजनक बात शामिल न हो। समिति की अनुमति मिलने के बाद ही विज्ञापन प्रकाशित किए जा सकते हैं।

बिना अनुमति विज्ञापन पर सख्ती

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यदि कोई विज्ञापन बिना पूर्व अनुमति के प्रकाशित होता है, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। आयोग का मानना है कि इस तरह के नियंत्रण से चुनाव के दौरान गलत सूचना या पक्षपातपूर्ण प्रचार को रोका जा सकता है, जिससे मतदाता सही जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें।

निर्देशों का दायरा और प्रक्रिया

इन दिशा-निर्देशों के तहत 8 और 9 अप्रैल को प्रिंट मीडिया में किसी भी प्रकार के राजनीतिक विज्ञापन पर प्रतिबंध लागू रहेगा। यदि किसी दल या उम्मीदवार को विज्ञापन प्रकाशित कराना है, तो उसे निर्धारित तारीख से कम से कम दो दिन पहले संबंधित जिला या राज्य स्तरीय समिति के पास आवेदन देना होगा। समिति द्वारा जांच के बाद ही अनुमति दी जाएगी।

चुनावी पारदर्शिता पर जोर

चुनाव आयोग का यह कदम चुनावी प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और संतुलित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल गलत या भ्रामक प्रचार पर रोक लगेगी, बल्कि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर भी मिल सकेगा। आयोग का मानना है कि इस तरह के उपाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने में सहायक होते हैं।

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