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Dhar Bhojshala Basant Panchami Security: भोजशाला में बसंत पंचमी और नमाज का महासंयोग, धार में दिखी जबरदस्त सुरक्षा…

Dhar Bhojshala Basant Panchami Security: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार शुक्रवार को बसंत पंचमी का पावन पर्व और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए हैं। किसी भी तरह के टकराव को रोकने के लिए (Communal Harmony Maintenance Measures) धार पुलिस ने सुरक्षा के ऐसे पुख्ता इंतजाम किए हैं कि परिंदा भी पर न मार सके। चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती कर दी गई है और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

Dhar Bhojshala Basant Panchami Security
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2016 वाला जादुई फॉर्मूला फिर होगा लागू

अफसरों को इस साल की चुनौती से निपटने के लिए साल 2016 के उस सफल मॉडल पर पूरा भरोसा है, जिसने बिना किसी हिंसा के स्थिति को संभाल लिया था। उस समय प्रशासन ने (Conflict Resolution Strategies in Dhar) एक ऐसी रणनीति अपनाई थी जिसमें न तो भोजशाला को खाली कराने की नौबत आई और न ही दोनों समुदाय आमने-सामने हुए। अधिकारियों का मानना है कि इस बार भी उसी पुराने और परखे हुए तरीके से शांति व्यवस्था कायम रखी जा सकती है।

मुस्लिम समाज का बड़ा कदम और सांकेतिक नमाज

शांति बनाए रखने की दिशा में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। उनकी ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वे सांकेतिक नमाज के लिए तैयार हैं। प्रशासन की योजना के अनुसार (Muslim Community Representation Statements) कमाल मौला मस्जिद वाले हिस्से को टेंट से पूरी तरह ढक दिया जाएगा ताकि पूजा और नमाज की प्रक्रिया अलग-अलग और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। इस बार पहले ही आपसी सहमति के सुर सुनाई दे रहे हैं जो एक अच्छी शुरुआत है।

2006 और 2013 की कड़वी यादों से सबक

इतिहास गवाह है कि जब भी शुक्रवार और बसंत पंचमी का संयोग बना है, धार में तनाव की स्थिति पैदा हुई है। साल 2006 और 2013 में हुए (Historical Religious Conflicts in Dhar) दंगों और तनावपूर्ण माहौल को प्रशासन अभी तक भूला नहीं है। हालांकि, 2016 में लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों की जरूरत नहीं पड़ी थी क्योंकि सीमित संख्या में नमाज अदा कराई गई थी। इसी अनुभव के आधार पर इस बार भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक हवन-पूजन का कार्यक्रम निर्बाध रूप से चलाने की तैयारी है।

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ धार शहर

बसंत पंचमी से तीन दिन पहले ही पूरा शहर सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। धार की ओर जाने वाले सभी मुख्य मार्गों पर (Police Force Deployment Updates) अस्थाई चौकियां स्थापित कर दी गई हैं। शहर के प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग कर हर वाहन की सघन चेकिंग की जा रही है। मंगलवार सुबह से ही अतिरिक्त पुलिस बल की टुकड़ियां पहुंचने लगी हैं, जिसमें सीआरपीएफ और आरएएफ की कंपनियां भी शामिल हैं, जो किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

ड्रोन पर पाबंदी और आसमान से निगरानी

प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए तकनीकी संसाधनों का भी सहारा लिया है। भोजशाला के ऊपरी हिस्से और आसपास के संवेदनशील (Aerial Surveillance and Drone Restrictions) इलाकों में निजी ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। पुलिस खुद आधुनिक कैमरों और ड्रोन के जरिए भीड़ पर नजर रखेगी। फ्लैग मार्च के जरिए जनता को यह संदेश दिया जा रहा है कि कानून व्यवस्था तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्सव समिति के जुलूस के लिए खुला रास्ता

पिछली बार की तरह इस बार भी प्रशासन भोजशाला में आने वाले उत्सव समिति के जुलूस को मुख्य द्वार पर नहीं रोकेगा। प्रवेश प्रक्रिया को (Religious Procession Management Rules) सरल बनाया गया है ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो। मुस्लिम समाज का सांकेतिक नमाज का फैसला प्रशासन के लिए राहत की खबर है, क्योंकि इससे परिसर के भीतर भीड़ का दबाव कम रहेगा और दोनों पक्षों के बीच दूरी बनाए रखना आसान होगा।

शांति और सद्भाव की अपील के साथ प्रशासन मुस्तैद

धार जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सरस्वती पूजन और जुमे की नमाज के बाद भी शहर में शांति बनाए रखना है। स्थानीय शांति समितियों के साथ (Interfaith Peace Committee Meetings) लगातार बैठकें की जा रही हैं। अफसरों का कहना है कि यह केवल एक सुरक्षा चुनौती नहीं है, बल्कि धार की गंगा-जमुनी तहजीब को बचाने की परीक्षा भी है। उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार का यह बड़ा दिन आपसी सौहार्द के साथ संपन्न होगा और एक नई मिसाल पेश करेगा।

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