Delhi Water Infrastructure Overhaul: प्यासी दिल्ली के नलों में घुला जहर, आखिर कौन है इस हालत का जिम्मेदार…
Delhi Water Infrastructure Overhaul: दिल्ली की रगों में बहता पानी अब सिर्फ प्यास बुझाने का जरिया नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। राजधानी की इस बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और साहसी कदम उठाते हुए करीब 50,000 करोड़ रुपये के महाप्रोजेक्ट की नींव रखी है। दिल्ली सरकार की इस (Strategic Urban Planning) के तहत अब पूरी दिल्ली की जर्जर हो चुकी पाइपलाइनों को जड़ से उखाड़कर नई तकनीक वाली लाइनें बिछाई जाएंगी। यह केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों को उस गंदे और बदबूदार पानी से निजात दिलाने की जंग है, जिसने दशकों से उनका जीना मुहाल कर रखा है।

जर्जर नेटवर्क और 16,000 किलोमीटर की चुनौती
दिल्ली के जल मंत्री ने साफ किया है कि शहर का वाटर नेटवर्क अपनी उम्र पूरी कर चुका है और अब छोटे-मोटे सुधारों से काम नहीं चलने वाला। वर्तमान में दिल्ली में लगभग 16,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का जाल बिछा हुआ है, लेकिन चौंकाने वाली सच्चाई यह है कि इसमें से 95 फीसदी हिस्सा पूरी तरह खराब हो चुका है। सरकार ने इस (Sustainable Water Management) को प्राथमिकता देते हुए चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े इलाकों में युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है। अब तक 9 विधानसभा क्षेत्रों में पुरानी पाइपों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, जो आने वाले समय में पूरी दिल्ली में फैलेगी।
गंदे पानी का वो दंश जिसे व्यवस्था ने अब तक नकारा
राजधानी के कई वीआईपी इलाकों को छोड़ दें, तो एक बड़ी आबादी आज भी नलों से आने वाले काले और बदबूदार पानी के भरोसे है। इस समस्या पर बात करते हुए जलमंत्री ने स्वीकार किया कि यह संकट रातों-रात पैदा नहीं हुआ, बल्कि यह दशकों की प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। दिल्ली के नीचे दबी पाइपलाइनें 20 से 30 साल पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं, जो अब जगह-जगह से टूट रही हैं। इस (Public Health Crisis) को जड़ से मिटाने के लिए सरकार ने अगले 10 वर्षों का एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ जल का मौलिक अधिकार मिल सके।
पानी की बर्बादी का आंकड़ा जो किसी को भी डरा दे
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि दिल्ली के लिए प्रोसेस किया गया आधा से ज्यादा पानी कभी लोगों के घरों तक पहुंचता ही नहीं? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पाइपलाइनों के लीकेज और टूटने के कारण करीब 55 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। यह (Water Resource Conservation) के लिहाज से एक बड़ा झटका है, क्योंकि 5,200 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइनें 30 साल से भी ज्यादा पुरानी हो चुकी हैं। जब तक इन गल चुकी पाइपों को बदला नहीं जाता, तब तक न तो पानी का दबाव बढ़ाया जा सकता है और न ही इसकी शुद्धता की गारंटी दी जा सकती है।
11 महीनों की सक्रियता और करोड़ों के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
पिछली सरकारों की सुस्ती और फंडिंग एजेंसियों के साथ चले टकराव ने दिल्ली को प्यासा रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन वर्तमान प्रशासन का दावा है कि उन्होंने महज 11 महीनों में वो कर दिखाया जो सालों से अटका था। इस (Infrastructure Investment Policy) के अंतर्गत चंद्रावल और वजीराबाद जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स, जो 2011 से फाइलों में दबे थे, उन्हें अब धरातल पर उतारा गया है। 11 महीने के छोटे से कार्यकाल में 7,212 करोड़ रुपये के 94 बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी गई है, जो दिल्ली की तस्वीर बदलने का दम रखते हैं।
दस साल का लक्ष्य और भविष्य की दिल्ली
सरकार का विजन स्पष्ट है कि अगले डेढ़ साल के भीतर पूरी दिल्ली में पाइपलाइन बदलने के टेंडर आवंटित कर दिए जाएंगे। लक्ष्य यह रखा गया है कि वर्तमान कार्यकाल में ही कम से कम 30 फीसदी काम पूरा कर लिया जाए। इस (Urban Development Execution) की गति को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक दशक में दिल्ली का कोना-कोना आधुनिक पाइपलाइन नेटवर्क से जुड़ जाएगा। यह निवेश न केवल पानी की बर्बादी रोकेगा, बल्कि दिल्ली जल बोर्ड के राजस्व घाटे को भी कम करने में मददगार साबित होगा, जिसे वर्तमान में ‘नॉन-रेवेन्यू वाटर’ की श्रेणी में रखा जाता है।
नई पाइपलाइनों से खत्म होगा बीमारी का डर
जब पाइपलाइनें पुरानी और टूटी होती हैं, तो उनमें सीवर का गंदा पानी मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। यही वजह है कि दिल्ली के कई हिस्सों में जलजनित बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है। सरकार की इस नई योजना में (Water Quality Assurance) को केंद्र में रखा गया है। नई तकनीक वाली पाइपलाइनें न केवल मजबूत होंगी, बल्कि उनमें सेंसर भी लगे होंगे जो किसी भी तरह के लीकेज की तुरंत सूचना देंगे। इससे न केवल पानी शुद्ध रहेगा, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी पूरे दबाव के साथ जल उपलब्ध हो पाएगा।
संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ती राजधानी
50,000 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा जल सुधार कार्यक्रम है। यह किसी राजनीतिक वादे से ऊपर उठकर एक ऐसी जरूरत बन गया है, जिसके बिना दिल्ली का वैश्विक शहर बनने का सपना अधूरा है। सरकार का कहना है कि काम कठिन है और इसमें समय लगेगा, लेकिन (Government Accountability) के साथ की जा रही यह शुरुआत मील का पत्थर साबित होगी। अब देखना यह होगा कि 10 साल का यह लंबा सफर दिल्लीवालों के जीवन में कितनी जल्दी और कितनी शुद्ध मिठास घोल पाता है।



